उदयपुर, संवाद सूत्र। संभाग के आदिवासी क्षेत्र में कोरोना के टीका को लेकर जारी अफवाह के चलते लोगों में इस कदर भय व्याप्त है कि वह वैक्सीनेशन के लिए तैयार नहीं। पिछले दिनों एक वृद्धा टीका के भय से जंगल में झाड़ियों के बीच जा छिपी तो कहीं वैक्सीनेशन के लिए घर-घर पहुंच रही टीमों को भगाया जा रहा है। उदयपुर जिले के कोटड़ा उपखंड में वैक्सीनेशन के लिए पहुंची टीम को विरोध झेलना पड़ा। यहां तक एक आदिवासी हाथ में कुल्हाड़ी लेकर पहुंचा तथा टीका लगाने वाली टीम को उसने धमकाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति टीका से मर गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? उसने कहा कि आप स्टाम्प पर लिखकर दो कि मुआवजा देना होगा।

बताया गया कि यह घटना कोटड़ा उपखंड के डिंगावरी कला पंचायत समिति का है। जहां मुख्य स्वास्थ्य ऑफिसर रमिला के नेतृत्व में वैक्सीनेशन के लिए एक टीम पहुंची थी। यह टीम घर-घर जाकर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक कर रही थी। इसी बीच एक ग्रामीण वहां हाथ में कुल्हाड़ी लेकर पहुंचा तथा वैक्सीनेशन के लिए पहुंची टीम को धमकाने लगा। उसने कहा कि यदि टीका से किसी की मृत्यु हो गई तो मुआवजा कौन देगा? उसने वैक्सीनेशन टीम से स्टाम्प पर यह लिखकर देने को कहा कि वह ऐसी स्थिति में मुआवजा देंगे। टीकाकरण कार्यक्रम के लिए पहुंची मुख्य स्वास्थ्य ऑफिसर रमिला का कहना था कि व्यक्ति शराब के नशे में था।

उसने यह कहा कि आदिवासी इलाके में कुल्हाड़ी या लकड़ी काटने के लिए कूंट लेकर चलना आम बात है। उसे वैक्सीनेशन के फायदे में बारे में बताने की कोशिश की लेकिन उसके उग्र होने पर उससे छुटकारा पाना हमारी मजबूरी थी और हम उस गांव से लौट आए। वह शराब के नशे में था और अभद्रता से बोल रहा था लेकिन उसने टीम को किसी तरह की क्षति नहीं पहुंचाई। इस घटना की सूचना पुलिस को दी गई है।

इधर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खराड़ी का कहना है कि अफवाह के चलते ग्रामीण इलाकों में लोग वैक्सीनेशन के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में कई जगहों पर मेडिकल टीम को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। इस मामले में पुलिस अधीक्षक से मिलकर मेडिकल टीम को सुरक्षा प्रदान कराने के लिए आग्रह किया जाएगा।

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