जयपुर [नरेन्द्र शर्मा]। राजस्थान के विधायकों को एक बार फिर विधानसभा भवन में भूत का भय सताने लगा है। विधानसभा भवन को अनशकुनी मानने वाले विधायक चाहते है कि 15वीं विधानसभा के गठन से पूर्व यज्ञ-हवन करके भवन की शुद्ध की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में सभी 200 विधायक एक साथ सदन में बैठ सकें।

14वीं विधानसभा के अंतिम सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विधायकों ने अध्यक्ष कैलाश मेघवाल से आग्रह किया कि भवन का शुद्धीकरण करवाया जाना चाहिए। जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री नंदलाल मीणा और सरकारी मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर का मानना है कि विधानसभा भवन में बुरी आत्माओं का साया होने की बात समय-समय पर सामने आई है। पंडितों और वास्तु विशेषज्ञों को भी विधानसभा भवन परिसर दिखाया गया है, उन्होंने कुछ उपाय बताए हैं।

गुर्जर का कहना है कि मैने शुक्रवार को भी विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि यज्ञ और हवन कराने के साथ ही पूरे परिसर में गंगाजल का छिड़काव होना चाहिए। विधायकों का कहना है कि वर्ष 2001 में विधानसभा नए भवन में शिफ्ट हुई, तभी से यहां कभी एक साथ 200 विधायक नहीं बैठे। राजस्थान में विधायकों की कुल संख्या 200 है, लेकिन पिछले 17 साल से सदन में एक साथ कभी पूरे विधायक नहीं बैठे, कभी किसी विधायक की मौत हो गई तो कभी किसी विधायक को जेल जाना पड़ा।

भाजपा विधायक ने बताया "भूतिया हवेली"
भाजपा के वरिष्ठ विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने विधानसभा भवन को "भूतिया हवेली" बताते हुए कहा कि पुरानी विधानसभा से नए परिसर में मंगलवार को शिफ्ट हुए थे, जो नहीं होना चाहिए था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से तत्कालीन विपक्ष के नेता स्व. भैरो सिंह शेखावत ने किसी अन्य दिन शिफ्ट करने का आग्रह किया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।

आहूजा का कहना है कि पूरे परिसर को गंगाजल से धोकर शुद्ध करवाया जाना चाहिए। कांग्रेस विधायक धीरज गुर्जर का कहना है, अब चुनाव होने है। हम आगामी विधानसभा में सभी सदस्य पूरे पांच साल एक साथ बैठना चाहते हैं, इसलिए भवन का शुद्धीकरण कर आत्माओं की शांति करवाई जानी चाहिए। 

मोक्षधाम की जमीन पर हुआ निर्माण
जयपुर के लालकोठी क्षेत्र में विधानसभा भवन का निर्माण श्मशान की कुछ जमीन पर भी हुआ है। वर्तमान विधानसभा भवन करीब 17 एकड़ में फैला हुआ है। दरअसल, विधानसभा भवन से करीब 200 मीटर दूरी पर मोक्षधाम बना हुआ है। भवन निर्माण के लिए कुछ जमीन मोक्ष धाम से भी एक्वायर की गई थी। वहीं, एक मजार भी पास में ही बनी हुई है।

किसी की मौत हुई तो कोई जेल गया
साल 1999 में नया विधानसभा परिसर बनकर तैयार हुआ। निर्माण कार्य के दौरान आधा दर्जन मजदूरों की विभिन्न कारणों से मौत हो गई। 11वीं विधानसभा में फरवरी 2001 में नए विधानसभा भवन को पुराने भवन से नए परिसर में शिफ्ट कर लिया गया। 25 फरवरी, 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन को इसका उद्धाटन करना था, लेकिन वे बीमार हो गए और बिना उद्घाटन के ही विधानसभा शुरू हो गई ।

इसके बाद एक संयोग ही जुड़ गया कि किसी ना किसी कारण एक साथ सभी 200 विधायक नहीं बैठे। वर्ष 2001 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के केबिनेट मंत्री भीखा भाई की मौत हो गई थी। इसके बाद विधायक किशन मोटवानी, भीमसेन चौधरी, वर्ष 2003 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री राम सिंह विश्नोई, वर्ष 2005 में विधायक अरुण सिंह की मौत हो गई।

इसके बाद वर्ष 2011 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के केबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा और कांग्रेस विधायक मलखान सिंह को चर्चित भंवरी देवी हत्या प्रकरण में जेल जाना पड़ा। इसके बाद इसी वर्ष एक एनकाउंटर मामले में भाजपा के दिग्गज विधायक राजेन्द्र राठौड को जेल जाना पड़ा। वर्ष 2013 में कांग्रेस विधायक बाबूलाल नागर और अप्रैल, 2017 में बसपा के बीएल कुशवाह को जेल जाना पड़ा। इसी तरह से सितंबर, 2017 में भाजपा विधायक कीर्ति कुमारी और फरवरी, 2018 मे कल्याण सिंह की मौत के बाद तो विधायकों में जबरदस्त भय बना हुआ है।  

Posted By: Preeti jha