उदयपुर, सुभाष शर्मा। Rajasthan Local Body Elections Results 2019. राजस्थान विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में मेवाड़-वागड़ अंचल में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था, लेकिन नगर निकाय चुनाव में इसके उलट परिणाम सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी उदयपुर नगर निगम में ही अपनी लाज बचा पाई है जबकि मेवाड़-वागड़ की अन्य सभी निकायों में उसकी स्थिति निराशाजनक रही। बांसवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ जिलों की सात नगर निकाय उसके हाथ से फिसल गईं।

उदयपुर नगर निगम में जहां भाजपा लगातार छठी बार बोर्ड बनाने में सफल रही और सत्तर सीटों में चवालीस सीटों पर उसने जीत हांसिल की। इसके विपरीत चित्तौडगढ़ जिले की तीनों नगर निकाय चित्तौड़गढ़ नगर परिषद, निम्बाहेड़ा तथा रावतभाटा नगर पालिका में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की है। चित्तौडगढ़ नगर परिषद के लिए कांग्रेस के 37, भाजपा के 23 प्रत्याशी विजयी रहे। निम्बाहेड़ा में कांग्रेस के 28, भाजपा के सोलह तथा एक

प्रत्याशी निर्दलीय जीता। जबकि रावतभाटा में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर भाजपा को महज नौ सीटों पर समेट दिया। यहां दो निर्दलीय प्रत्याशियों को भी जीत मिली।

इधर, बांसवाड़ा जिले की बांसवाड़ा नगर परिषद कांग्रेस ने भाजपा से छीन ली वहीं परतापुर गढ़ी में भाजपा बहुमत से तीन सीट पीछे रह गई। यहां कांग्रेस ने दस सीटों पर जीत दर्ज की तथा तीन निर्दलीय पार्षद उसके

समर्थन में बताए जा रहे हैं। बांसवाड़ा नगर परिषद के लिए कांग्रेस के 37 पार्षद निर्वाचित हुए। यहां भाजपा को बीस तथा निर्दलीय को तीन सीटें हाथ लगीं। राजसमंद जिले की दो नगर पालिकाएं नाथद्वारा और आमेट में चुनाव हुए थे। इनमें भाजपा बोर्ड काबिज थे और इस बार दोनों जगह कांग्रेस प्रत्याशियों को बड़ी जीत मिली। आमेट पालिका में भाजपा को सात, कांग्रेस को अठारह सीटों पर जीत मिली, वहीं नाथद्वारा पालिका में कांग्रेस के कांग्रेस के 29 तथा भाजपा के दस पार्षदों के अलावा एक निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुआ।

कानोड़ में रोचक मुकाबला, जनता सेना तय करेगी किसका बनेगा बोर्ड

उदयपुर जिले की कानोड़ नगर पालिका में बेहद रोचक मुकाबला देखने को मिली है। बीस वार्डों की इस नगर पालिका में कांग्रेस और भाजपा के सात-सात प्रत्याशियों को जीत मिली है। जबकि बाकी छह वार्डों में जनता सेना के प्रत्याशी विजयी रहे। यहां किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल पाया है। ऐसे में कानोड़ नगर पालिका में बोर्ड किसका बनेगा, यह जनता सेना तय करेगी।

जनता सेना भाजपा विचारधारा रखती है और उसके संरक्षक पूर्व विधायक रणधीरसिंह भींडर वसुंधरा राजे के नजदीकी है लेकिन नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के धुरविरोधी हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यहां जनता सेना और कांग्रेस के मिलकर बोर्ड बनाए जाने की संभावना ज्यादा है लेकिन पिछले बार यहां धुरविरोधी कांग्रेस और भाजपा ने मिलकर बोर्ड गठित कर बहुमत के करीब पहुंची जनता को धता बता दिया था। पिछली बार यहां जनता सेना ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी। 

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Posted By: Sachin Mishra

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