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Sachin Pilot Interview: राजस्थान में सरकार होने के बावजूद 11 सीटों पर क्यों हारी बीजेपी? सचिन पायलट ने बताई वजह

दस साल बाद कांग्रेस को मिली सफलता का प्रमुख रणनीतिकार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को माना जा रहा है। पायलट ने पिछले छह महीने में पूरे प्रदेश का दौरा किया। कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर राज्य की भाजपा व केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ माहौल बनाया। यही कारण है कि कांग्रेस के जो आठ सांसद चुनाव जीते हैं उनमें से छह पायटल के विश्वस्त माने जाते हैं।

By Jagran News Edited By: Abhinav Atrey Sat, 15 Jun 2024 06:27 PM (IST)
लोकसभा चुनाव में वोट केंद्र और राजस्थान सरकार के खिलाफ पड़े- पायलट (फोटो, जागरण)

जेएनएन, जयपुर। राजस्थान के अतिरिक्त अपने प्रभार वाले राज्य छत्तीसगढ़ में प्रत्येक तीसरे दिन जनसभाएं। इस मेहनत का नतीजा भी सामने है कि पिछले दो लोकसभा चुनावों में लगातार राजस्थान की सभी 25 सीटों पर चुनाव हार रही कांग्रेस ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में आठ सीटें हासिल कीं। कांग्रेस को मिली इस सफलता का प्रमुख रणनीतिकार कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को माना जा रहा है।

हालांकि, वह इसका पूरा श्रेय राजस्थान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को देते हैं। इस सफलता से उत्साहित सचिन ने आगे की अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि अब दमन और प्रतिशोध की राजनीति नहीं चलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ लंबे समय से चली आ रही वर्चस्व की लड़ाई ने कहीं न कहीं उनकी छवि को भी धूमिल किया था, लेकिन वह दाग मिटते नजर आ रहे हैं।

आने वाले पांच सालों में अहम भूमिक निभाएंगे

बीते शुक्रवार को उन्होंने लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भाजपा की कमजोरी व इंडिया गठबंधन की सफलता का ब्योरा पेश करते हुए इस बात के संकेत दिए कि आने वाले समय में वह कांग्रेस के उन चंद चेहरों में शामिल रहेंगे, जो आने वाले पांच सालों में अहम भूमिक निभाएंगे। दैनिक जागरण राजस्थान के राज्य संवाददाता नरेंद्र शर्मा की सचिन पायलट से विभिन्न मुद्दों पर हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

राज्य में सत्ता होते हुए भी भाजपा की 25 में से 11 लोकसभा सीटों पर हार के आप क्या कारण मानते हैं?

मतदाताओं ने एनडीए सरकार के खिलाफ वोट दिया है। भाजपा की डबल इंजन की सरकार फेल हो गई। मतदाताओं को एनडीए की दस साल की सरकार और भाजपा की असलियत का पता चला है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बने करीब छह महीने हो गए, लेकिन आम लोगों को राहत देने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इस बात से मतदाताओं में नाराजगी थी। कांग्रेस ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा। प्रत्याशियों का चयन बेहतर ढंग से किया। लोकसभा चुनाव का शुद्ध रूप से आकलन करेंगे तो यह वोट सरकार के खिलाफ पड़े हैं। सरकार ने आर्थिक दृष्टि से सिर्फ चंद लोगों को फायदा पहुंचाने का काम किया। यह बात मतदाताओं के समझ में आ गई। मतदाताओं को पता है कि कांग्रेस जब भी सत्ता में रही समाज के हर वर्ग के बारे में सोचा और काम किया।

25 में से 11 लोकसभा सीटों पर हार को क्या राज्य में भाजपा सरकार की लोकप्रियता कम होना माना जाना चाहिए?

यह बात सही है कि राज्य में भाजपा की सरकार लोकप्रिय नहीं है। जिन मुद्दों को लेकर भाजपा राज्य की सत्ता में आई थी, उन पर कोई काम नहीं किया गया। आम जनता के हितों के विपरित काम किया जा रहा है। भाजपा के नेताओं की आपसी गुटबाजी और खींचतान का असर राज्य सरकार के कामकाज पर साफ नजर आ रहा है। अधिकारी सरकार चला रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ब्यूरोक्रेसी पर पकड़ नहीं है। भाजपा सरकार छह महीने में ही अलोकप्रिय हो गई है।

आप राज्य की भाजपा सरकार को किन-किन मोर्चों पर असफल मानते हैं?

राज्य सरकार हर मोर्चे पर असफल हुई है। कोई भी एक मोर्चा ऐसा नहीं है, जिस पर भाजपा सरकार को सफल माना जा सके। गर्मी में लोगों को मांग के अनुसार पानी और बिजली नहीं मिल रही है। लोग पानी और बिजली के लिए परेशान हो रहे हैं। किसान और युवा परेशान हैं। पुरानी जनहित की योजनाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकार में कोई काम नहीं हो रहा है।

लोकसभा चुनाव में मिले जनादेश को आप पूरे देश के लिहाज से किस तरह से देखते हैं?

लोकसभा चुनाव में एनडीए को खंडित जनादेश मिला है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। अब पिछले दस सालों की तरह सरकार की मनमानी नहीं चलेगी। संसद में अब पहले जैसा व्यवहार नहीं चलेगा। लोकसभा चुनाव से यह स्पष्ट संदेश गया है कि दमन और प्रतिशोध की राजनीति अब नहीं चलेगी। जिस तरह से 147 सांसदों को एक साथ निलंबित किया गया था, उस कार्रवाई को लोगों ने पसंद नहीं किया। दो-दो निर्वाचित मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला गया था। कांग्रेस के नेताओं को प्रताड़ित किया गया था। इस बार जनता ने आदेश दिया है कि घमंड व अहंकार को त्यागकर आगे बढ़ना है। भाजपा 303 सांसदों के साथ चुनाव में गई थी और दावा किया था कि 400 सीट लेकर आएंगे, लेकिन जब नतीजे आए तो भाजपा के सांसद कम हो गए। गठबंधन का आंकड़ा कम हुआ है। भाजपा की भाषण, प्रचार और प्रोपेगंड़ा की राजनीति फेल हो गई।

राजस्थान में कांग्रेस की आठ सीटों पर जीत के आप क्या कारण मानते हैं। जीत का श्रेय आप किसको देना चाहेंगे?

जीत का श्रेय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को है। अगर कार्यकर्ता कड़ी धूप में मेहनत नहीं करते तो हम जीत नहीं पाते। नेता और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाई। केंद्र व राज्य सरकार की विफलताओं और दमनकारी नीतियों की जानकारी मतदाताओं तक पहुंचाई। मतदाताओं का कांग्रेस को जीत दिलाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। कांग्रेस हमेशा सकारात्मक राजनीति करती है। यह बात मतदाताओं को पता है।

भाजपा हमेशा डबल इंजन की सरकार की बात करती है। आपको क्या लगता है लोकसभा चुनाव में राजस्थान में भाजपा को डबल इंजन की सरकार के नारे का लाभ नहीं मिला?

भाजपा की डबल इंजन की सरकार फेल हो गई। भाजपा का डबल इंजन राजस्थान, हरियाणा व उत्तर प्रदेश में फेल हो गया। भाजपा की डबल इंजन की सरकार को किसान, युवाओं व आम जनता ने साफ संदेश दिया कि डबल इंजन केवल नारा है। भाजपा सरकार ने कोई काम नहीं किया है। कांग्रेस ही देश और प्रदेश का विकास कर सकती है, यह बात आम जनता को पता है। जनादेश एनडीए गठबंधन के खिलाफ आया है। भाजपा जिन नीतियों व शब्दों के साथ चुनाव में गई, उसको लोगों ने पसंद नहीं किया।

लोकसभा चुनाव में दस साल बाद भाजपा को 11 सीटों पर हराने के बाद कांग्रेस की राज्य में आगामी कार्ययोजना क्या रहेगी। अब कांग्रेस की आगामी रणनीति क्या होगी?

कांग्रेस पूरे प्रदेश में सक्रिय रहेगी। आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता संघर्ष करेंगे, आंदोलन करेंगे। जहां अवसर मिलेगा, वहां आम लोगों की आवाज उठाएंगे। आम लोगों को हर तरह से राहत मिल सके, इसका प्रयास किया जाएगा। पार्टी पहले से मजबूत है। अब अधिक मजबूत किया जाएगा। पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव में भी कांग्रेस की बढ़त बने, इसके लिए रणनीति बनाकर काम किया जाएगा।

राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी और नेताओं की आपसी खींचतान की बात समय-समय पर उठती रहती है। आपको लगता है कि वास्तव में कांग्रेस में गुटबाजी है?

कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता पूरी तरह से एकजुट हैं। कांग्रेस में कोई खींचतान नहीं है। सब एकजुट हैं, तब ही 11 सीटों पर भाजपा को हराया है। कई सीटें तो ऐसी हैं, जिन पर भाजपा के प्रत्याशी मुश्किल से चुनाव जीते हैं। गुटबाजी तो भाजपा में है। भाजपा के नेता अलग-अलग खेमों में बंटे हुए हैं। भाजपा हवा में बातें करती है। कांग्रेस जमीन पर काम करती है।

लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद आप एनडीए और इंडिया गठबंधन के लिए क्या कहेंगे?

चुनाव में कांग्रेस पार्टी और इंडिया गठबंधन को जनता का भरपूर आशीर्वाद मिला है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने, अग्निपथ योजना को खत्म करने, बेरोजगारी व महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर हमने पूरे चुनाव पर फोकस किया। भाजपा का प्रचार मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुसलमान, मंगलसूत्र पर रहा। इन बातों को लोगों ने स्वीकार नहीं किया। इनकी सरकार ने विपक्ष के प्रति जो रवैया अपनाया वह ठीक नहीं माना जा सकता है। विपक्ष के बैंक खातों को सीज करना व सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग यह सब जनता समझ चुकी है। भाजपा को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। मैं जनता का कायल हूं। तमाम बाधाओं, दबाव व प्रलोभन के बावजूद हमारे कार्यकर्ताओं ने हिम्मत नहीं हारी।

लोकसभा चुनाव परिणाम को देश व राज्य के संदर्भ में किस तरह से देखा जाना चाहिए?

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को अपार जनसमर्थन मिला है। कांग्रेस का प्रदर्शन राजस्थान में बेहतर रहा है। पिछले चुनाव में हम एक भी सीट नहीं जीत सके थे। इस बार भाजपा को 11 सीटों पर पराजित कर पाए हैं। यह सबकी सामूहिक मेहनत का परिणाम है। अच्छे प्रत्याशियों का चयन हुआ। कांग्रेस का चुनाव घोषणा-पत्र, चुनाव अभियान, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की पदयात्रा, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव प्रियंका गांधी ने पूरे देश में जो प्रचार किया उसका लाभ पार्टी को मिला है। इंडिया गठबंधन को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल हर जगह सफलता मिली है।

राजस्थान में इंडिया गठबंधन में शामिल होकर नागौर सीट से चुनाव जीतने वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने गठबंधन की बैठक में नहीं बुलाने पर नाराजगी जताई है?

सब लोग जो इंडिया गठबंधन में थे, वे अब भी गठबंधन में हैं। आने वाले समय में गठबंधन में अन्य दल भी शामिल होंगे। सब एकजुट होकर सरकार के खिलाफ संघर्ष करेंगे।

एनडीए की तीसरी सरकार के बारे में आप क्या कहेंगे?

केंद्र में गठजोड़ की सरकार बनी है। यह गठजोड़ अधिक दिन तक चलने वाला नहीं है।

सुना है कि पायलट सरनेम के पीछे बहुत ही रोचक कहानी है? और इसका चुनाव से संबंध है...क्या यह सही है? साथ ही यह भी है कि आपका परिवार मूलतः राजस्थान नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से संबंध रखता है?

जी बिल्कुल। मेरे पिता उत्तर प्रदेश के नोएडा के पास वैदपुरा गांव के रहने वाले थे। हम लोग किसान परिवार से आते हैं। उनका असली नाम राजेश्वर प्रसाद बिधुड़ी था। मेरे पिता ने उस समय पारिवारिक पृष्ठभूमि से हटकर वायुसेना ज्वाइन किया था और वह पायलट थे। उन्होंने 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध में भी भाग लिया था। वह गांधी परिवार के करीब थे। ये बात साल 1980 की है। राजीव गांधी के कहने पर वह राजस्थान के भरतपुर पहुंचे। दिल्ली से पार्टी कार्यकर्ताओं को ये संदेश पहुंचा था कि कोई पायलट यहां चुनाव लड़ने आ रहा है। वे यहां पहुंचे तो कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी दिखी। कार्यकर्ताओं को लगा कि ये वो पायलट नहीं है, जिसके बारे में दिल्ली से हमें संदेश मिला था। उस समय मेरे पिता ने फोन पर राजीव गांधी से बात की। उन्होंने सुझाव दिया कि कचहरी जाकर तुरंत अपना नाम बदल दो।

नाम बदलने के बाद शाम को उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक ली। चुनाव नजदीक था, इसलिए तय हुआ कि रातों-रात भरतपुर शहर की हर दीवार पर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उनका, यानी राजेश पायलट नाम लिखा जाएगा, ताकि हर आदमी के दिमाग में ये नाम बैठ जाए। उस दौर में इंटरनेट मीडिया का इतना जोर नहीं था, इसलिए दीवारें पार्टियों और प्रत्याशियों के लिए प्रचार का अहम प्लेटफॉर्म हुआ करता था। बस वह दिन था... राजेश्वर प्रसाद बिधुड़ी नए नाम और नई पहचान के साथ हमेशा के लिए राजेश पायलट हो गए। मेरे लिए सबसे ज्यादा रोचक और गर्व करने वाली बात क्या है, आपको पता है...? सबको अपना उपनाम पैतृक रूप से मिलता है, लेकिन हमें तो यह पहचान पार्टी ने दी है। यह हमारी निष्ठा का पर्याय है।

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