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सीएम भजनलाल शर्मा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच बढ़ी खींचतान, मुख्यमंत्री के बुलाए बैठक में नहीं पहुंचे नाराज कृषि मंत्री

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय से बुलावे के बावजूद मीणा शुक्रवार को जयपुर शासन सचिवालय में आयोजित कृषि विभाग की बैठक में नहीं पहुंचे।यह बैठक बजट पूर्व किसान नेताओं के साथ संवाद करने के लिए बुलाई गई थी। मीणा इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।

By Jagran News Edited By: Sonu Gupta Fri, 21 Jun 2024 10:12 PM (IST)
सीएम भजनलाल शर्मा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच बढ़ी खींचतान, मुख्यमंत्री के बुलाए बैठक में नहीं पहुंचे नाराज कृषि मंत्री
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच खींचतान बढ़ी। फाइल फोटो।

जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय से बुलावे के बावजूद मीणा शुक्रवार को जयपुर शासन सचिवालय में आयोजित कृषि विभाग की बैठक में नहीं पहुंचे।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुए शामिल

यह बैठक बजट पूर्व किसान नेताओं के साथ संवाद करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक में मिले सुझावों को बजट में शामिल किया जाएगा। मीणा इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। उनका बैठक में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होने को राजनीतिक गलियारे में नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्यों नाराज हैं मीणा?

जानकारी के अनुसार, पिछले चार दिन से हो रही बजट पूर्व चर्चाओं में संबंधित विभागों के मंत्री पहुंचे लेकिन शुक्रवार को कृषि मंत्री मीणा ही बैठक में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचे। बैठक में भाजपा से जुड़े किसान नेता भी मौजूद थे। दरअसल, मीणा वरिष्ठता के बावजूद कम महत्व विभाग दिए जाने से सरकार बनने के बाद से ही नाराज हैं। मीणा को कृषि विभाग का जिम्मा दिया गया, लेकिन कृषि विपणन विभाग उन्हें नहीं दिया गया। कृषि विपणन विभाग दूसरे मंत्री को दे दिया गया।

इसी तरह ग्रामीण विकास विभाग तो दिया गया, लेकिन पंचायती राज विभाग अलग कर दिया गया, जबकि पूर्व की सरकारों में पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग एक ही मंत्री के पास रहे हैं। साथ ही अपने गृह जिले दौसा और राजनीतिक कार्यक्षेत्र सवाई माधोपुर जिले में भी अधिकारियों के तबादलों में मीणा की सलाह को महत्व नहीं दिया गया।  

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