सीकर डबल मर्डर केस: राजस्थान हाईकोर्ट ने 11 आरोपियों को किया बरी, पुलिस जांच पर उठाए सवाल
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2019 के सीकर दोहरे हत्याकांड में मौत की सजा पाए एक कैदी सहित सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया है।

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला।
HighLights
हाईकोर्ट ने 11 आरोपियों को सीकर हत्याकांड में बरी किया।
अभियोजन पक्ष पुख्ता सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहा।
पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के लिए SOP बनाने का निर्देश।
डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने 2019 के चर्चित सीकर दोहरे हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मौत की सजा पाए एक कैदी समेत सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अटूट परिस्थितिजन्य सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
बता दें कि यह मामला 21 अक्टूबर 2019 का है, जब सीकर में एक रिश्ते में रह रहे युवक और एक महिला की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में निचली अदालत ने एक दोषी को मौत की सजा, नौ अन्य को उम्रकैद और एक को सबूत नष्ट करने के जुर्म में सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत?
जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने 30 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। बचाव पक्ष के वकीलों ने जांच के दौरान पेश किए गए CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए थे।
वकीलों ने बताया कि डीवीआर (DVR) की जब्ती में देरी हुई, कोई उचित सीलिंग नहीं की गई और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की सुरक्षा में कई बड़ी खामियां थीं। अदालत ने इन दलीलों को सही मानते हुए कहा कि पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि सभी सबूत केवल और केवल आरोपियों की तरफ इशारा करते हैं।
पुलिस जांच पर गंभीर सवाल और SOP का आदेश
अदालत ने इस मामले में पुलिस की लचर और लापरवाही भरी जांच पर गहरी चिंता जताई। बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच अधिकारी और उनके पर्यवेक्षक अक्सर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के नियमों और प्रक्रियाओं से अनजान होते हैं। इसके अलावा इसे सुधारने के लिए हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़े निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि दो महीने के भीतर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (CCTV, CDR आदि) को जुटाने, जब्त करने, सुरक्षित रखने और पेश करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए। जांच अधिकारियों, सुपरवाइजरी अफसरों और पब्लिक प्रॉसेसरों के लिए इसकी ट्रेनिंग अनिवार्य की जाए। इसके अलावा अदालत ने इस आदेश पर तीन महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
बरी किए गए 11 आरोपी के बारे में जानिए
गौरतलब है कि जिन लोगों को अदालत ने बरी किया है, उनके नाम रामगोपाल उर्फ गोपाल, महादेव, महेंद्र कुमार चौधरी, संदीप गुर्जर, बीरबल ढाका, नंदलाल उर्फ नंदकर, मदनलाल चांदीवाल, सोहनलाल जाट, बाबूलाल उर्फ हरनेक फल्डोलिया, परसाराम चोपड़ा और राजेश कुमार हैं।
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