जयपुर, मनीष गोधा। Rajasthan government: देश में आर्थिक मंदी पर कांग्रेस के 11 नवंबर से शुरू हो रहे देशव्यापी आंदोलन से पहले ही राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अशोक गहलोत ने वित्त विभाग के अधिकारियों से कहा है कि केंद्र से इस बार करीब साढ़े सात हजार करोड़ रुपये कम मिलने की आशंका है, इसलिए विकास कार्यों की प्राथमिकता फिर से निर्धारित करें।

राजस्थान में किसानों की कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते जैसी बड़े चुनावी वादों को पूरा करने की मजबूरी के चलते सरकार की आर्थिक स्थिाति बहुत अच्छी नहीं है। देश में आर्थिक मंदी के चलते जीएसटी व अन्य केंद्रीय करों से राज्यों को मिलने वाले अंश और केंद्रीय सहायता व अनुदान में कमी आने की आशंका जाहिर की जा रही है। इस बीच, कांग्रेस ने 11 नवंबर से देश के आर्थिक हालात, बैंकों की बिगड़ती स्थिति, मंदी और अन्य आर्थिक मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की हुई है। ऐसे में राजस्थान की कांग्रेस सरकार केंद्र से मिलने वाले राज्यांश में होने वाली संभावित कटौती को बड़ा मुद्दा बनाती दिख रही है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान के वित्त विभाग के अधिकारियों से कहा कि केंद्र से प्राप्त होने वाली करों की हिस्सा राशि व अनुदान में कमी की आशंका है। उन्होंने कहा कि देश की कमजोर होती अर्थव्यवस्था व जीएसटी सहित केंद्र सरकार के अन्य अदूरदर्शी निर्णयों के कारण राजस्व प्राप्तियों में कमी आई है, जिसका प्रभाव राजस्थान पर भी पड़ा है। गहलोत ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य को न केवल केंद्रीय करों से मिलने वाली हिस्सा राशि में लगभग 4172 करोड़ रुपये बल्कि, विभिन्न केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के अनुदान में करीब 3176 करोड़ रुपये की कटौती संभावित है।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए राजस्थान को केंद्र से लगभग 5600 करोड़ कम मिले थे तथा चालू वित्त वर्ष में करीब 7348 करोड़ रुपये कम मिलने की आशंका है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इसे देखते हुए विकास कार्यों की प्राथमिकता नए सिरे से तय करना जरूरी हो गया है। गहलोत ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए राजस्व संग्रहण के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं और हमारे पिछले कार्यकाल में जिस तरह कुशल वित्तीय प्रबंधन रहा था, उसी तरह की कार्ययोजना बनाकर राज्य को मजबूती के साथ विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाएं।

ये है मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली छमाही की स्थिति

वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर तक के पहले छह माह में राज्य सरकार को लक्ष्य के मुकाबले 41.41 प्रतिशत राजस्व प्राप्ति हुई है, जो पिछले वर्ष के पहले छह माह के मुकाबले करीब सवा दो प्रतिशत कम है। केंद्र से जीएसटी व अन्य करों के राज्यांश के रूप में अब तक 38.46 प्रतिशत राशि मिली है। यह भी पिछले वर्ष के मुकाबले करीब ढाई प्रतिशत कम है। यहां का वित्त विभाग केंद्रीय अनुदान व सहायता में कमी का दावा कर रहा है, हालांकि आंकड़े बता रहे हैं कि इस मद में राज्य सरकार को अब तक 60.98 प्रतिशत राशि मिल चुकी है, जबकि पिछले वर्ष सितंबर तक 46.11 प्रतिशत राशि ही मिली थी।

राज्य का खुद का राजस्व संग्रहण लक्ष्य के मुकाबले काफी कम है। जीएसटी के रूप में पिछले वर्ष सितंबर तक 50.77 प्रतिशत राशि मिल चुकी थी, जबकि इस बार 37.86 प्रतिशत राशि ही आई है। वहीं, स्टांप व रजिस्ट्रेशन में पिछले वर्ष के मुकाबले छह प्रतिशत और बिक्त्री कर में 10 प्रतिशत की कमी है। भू-राजस्व से सरकार को पिछले वर्ष के मुकाबले 14 प्रतिशत ज्यादा राजस्व मिल चुका है।

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Posted By: Sachin Mishra

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