राजस्थान SOG की रडार पर फर्जीवाड़े से डॉक्टर बनने वाले 100 से ज्यादा लोग, 38 लोग गिरफ्तार
राजस्थान में फर्जी एमबीबीएस प्रमाण पत्रों के आधार पर डॉक्टर बनने का बड़ा खुलासा हुआ है। एसओजी ने अब तक ...और पढ़ें

एसओजी ने फर्जीवाड़े में 38 लोगों को गिरफ्तार किया।
HighLights
एसओजी ने फर्जीवाड़े में 38 लोगों को गिरफ्तार किया।
लाखों रुपये देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र हासिल किए।
आरएमसी अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध पंजीकरण हुआ।
जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर चिकित्सक बनने का बड़ा मामला सामने आया है। विदेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बावजूद भारत में अनिवार्य विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) पास नहीं कर सके कई लोगों ने दलालों के माध्यम से 18 से 25 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाण पत्र हासिल कर लिए।
इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) के अधिकारियों की मिलीभगत से पंजीकरण भी करवा लिया। फर्जीवाड़े की जांच कर रही स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) अब तक 38 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग जांच के दायरे में हैं।
इस मामले में आरएमसी के तत्कालीन पंजीयक डा. राजेश शर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि फर्जीवाड़ा सामने आते ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो रही हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, रूस, किर्गिस्तान, चीन, यूक्रेन, जर्मनी और बांग्लादेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। हालांकि, वे भारत में चिकित्सा कार्य करने के लिए अनिवार्य एफएमजीई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके।
इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो तीन से चार बार परीक्षा देने के बावजूद असफल रहे। ऐसे में इन्होंने दलालों के माध्यम से मोटी रकम देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र बनवा लिए। इसके बाद आरएमसी के अधिकारियों को रिश्वत देकर पंजीकरण कराया। इतना ही नहीं, फर्जी दस्तावेज के आधार पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग से इंटर्नशिप की अनुमति हासिल कर सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप भी पूरी कर ली।
तीन बार में फेल होने के बाद 22 लाख में खरीदा फर्जी प्रमाण पत्र
एसओजी ने बुधवार को कोटपूतली-बहरोड़ जिले के निवासी राकेश यादव को गिरफ्तार किया। राकेश ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी, लेकिन तीन बार प्रयास करने के बावजूद एफएमजीई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका।
इसके बाद उसने अलवर निवासी नफीस खान और शुभम गुर्जर के माध्यम से 22 लाख रुपये में फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र हासिल किया। इसी के आधार पर उसने दौसा के मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की।
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