जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अमेरिका के ह्यूस्‍टन में 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी ने वहां कहा कि "अबकी बार ट्रंप सरकार" यह एक गलत परंपरा है। इसकी जितनी आलोचना की जाए, उतनी कम है। देश के 70 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है कि कोई प्रधानमंत्री विदेश में जाकर पर्टिकुलर कैंडिडेट का प्रचार करे। गहलोत ने कहा कि अगर टंप की जगह कोई अन्य अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाता है तो भारत-अमेरिका के रिश्तों का क्या होगा। इस बात पर विचार करना चाहिए।

मंगलवार को जयपुर में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि व्यक्तिगत दोस्ती अपनी जगह है और राजनीतिक स्टेप अपनी जगह होते हैं, लेकिन मोदी ने गलत कदम उठाया है, मैं इसकी आलोचना करता हूं। गहलोत ने कहा कि शुरू से हमारी विदेश नीति थी कि हम नॉन अलाइन है, जिसकी स्थापना पूर्व पीएम स्व.पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने की थी उसकी धज्जियां उड़ा दी गई। दुनियाभर में "हाउडी मोदी" की चर्चा हो रही है। दुनिया के लोग आलोचना कर रहे हैं कि हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री अमेरिका जाकर वहां एक राजनीतिक पार्टी का प्रचार करके आ गया। गहलोत ने कहा कि मोदी ट्रंप के साथ जीवनभर दोस्ती निभाओ, लेकिन देश को रिप्रजेंट कर के जिस तरह से कैंपेन किया है, उसे देशवासी उचित नहीं मान सकते हैं।

जवाब मांगने वाले पर खड़े किए जाते हैं सवाल 

गहलोत ने कहा कि भाजपा सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को गुमराह कर रही है। इनकी टीमें बैठी हैं, जिनका काम है लोगों को मैसेज ही ऐसे दो कि वो मोदी-मोदी करते रहे। लेकिन साहित्यकार, लेखक, वैज्ञानिक और बौद्धिक लोग इनकी हरकतों को समझ चुके हैं। देश किस दिशा में जा रहा है, यह सोचना पड़ेगा। जिस तरह से धर्म के आधार पर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है, वह सब लोग देख रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने से राष्ट्रीयता की भावना पैदा हो गई, यह माहौल बनाकर राजनीति की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में 45 दिन से इंटरनेट बंद है। वहां के लोगों को देशवासियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हम कहते हैं कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है तो देश के प्रधानमंत्री की यह ड्यूटी है कि वह लोगों को बताए कि वहां एक तरफा कार्रवाई क्यों की गई, आज वहां के हालात क्या हैं। कश्मीर के हालात को लेकर सरकार को लेकर लोगों को जानकारी देनी चाहिए। लेकिन हालात यह हो गए कि अगर कोई जवाब मांगता है तो उस पर ही सवाल खड़े किए जाते हैं। दुनिया में यह बात सामने आ रही है कि कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। यह बात कभी ना कभी हमारे देश के लिए मुश्किल खड़ी करेगी।

एनआरसी पर भाजपा के लोग ही कर रहे हैं आलोचना 

गहलोत ने एक सवाल के जवाब में कहा कि एनआरसी असम में फेल हो चुका है। असम में तो उनकी खुद की पार्टी के लोग आलोचना कर रहे हैं तो इसमें आगे क्या होने वाला है। इस बारे में पहले सभी से चर्चा की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि देश में भय का माहौल पैदा कर दिया गया है।

'अबकी बार ट्रंप सरकार' के पीएम नरेंद्र मोदी के बयान पर एतराज जताते हुए कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चुनाव प्रचार करने से परहेज करना चाहिए था। पार्टी का कहना है कि ट्रंप के पक्ष में पीएम का राजनीतिक बयान आजादी के बाद से चली आ रही भारत की तटस्थ विदेश नीति की परंपरा के प्रतिकूल है।

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सोमवार को कहा था कि अमेरिका के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी वहां की दलीय राजनीति की सीमाओं से परे है। हम इसी का समर्थन करते हैं। जहां तक भारत की विदेश नीति का सवाल है तो जब भी हमारे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री दूसरे देश की यात्रा करते हैं तो वे वहां की अंदरूनी राजनीति से दूर रहते हैं। भारत किसी देश के चुनाव में किसी का पक्ष नहीं लेता।

शर्मा ने कहा कि इस लिहाज से 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम के मंच पर प्रधानमंत्री का अमेरिकी राष्ट्रपति के पक्ष में नारा लगाना उचित नहीं था। पीएम को 'अबकी बार ट्रंप सरकार' का नारा लगाने से बचना चाहिए था और इसका गलत मतलब निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा संबंध दो राष्ट्रों के बीच होता है और इसीलिए हम आंतरिक चुनाव पर कोई टिप्पणी नहीं करते।

शर्मा ने कहा कि पीएम की टिप्पणी इस लिहाज से भी गैरजरूरी थी कि अमेरिका में चाहे रिपब्लिकन पार्टी हो या डेमोक्रेट पार्टी हम दोनों के साथ काम कर चुके हैं। जब रिपब्लिकन पार्टी के नेता जार्ज बुश अमेरिकी राष्ट्रपति थे तब हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने ऐतिहासिक परमाणु समझौते का करार किया। मनमोहन और बुश के बीच काफी अच्छे रिश्ते थे, लेकिन वहां के राष्ट्रपति चुनाव में बुश का प्रचार नहीं किया बल्कि तटस्थ रहे। इसीलिए चुनाव बाद जब डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता बराक ओबामा राष्ट्रपति बने तो हमने अमेरिका के साथ रिश्तों को उसी गर्मजोशी और गति से जारी रखा जैसा बुश प्रशासन में था।

शर्मा ने कहा कि जहां तक भारत का रणनीतिक हित है कांग्रेस का मानना है कि हमें अमेरिका के सभी पक्षों से बेहतर ताल्लुक रखना चाहिए। इसीलिए हमें ट्रंप के कार्यक्रम में आने पर कोई आपत्ति नहीं क्योंकि उन्हें निमंत्रण दिया गया था। शर्मा ने कहा कि ट्रंप का इतना बड़ा स्वागत हुआ तो हम उम्मीद करते हैं कि पीएम उन्हें राजी करेंगे कि भारतीयों की वीजा पाबंदी और निर्यात की अमेरिका की सख्ती घटाने का प्रयास करेंगे। 

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Posted By: Sachin Mishra

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