पंजाब का पानी पर रायल्टी की मांग असंवैधानिक, राजस्थान ने उठाए कानूनी सवाल
पंजाब सरकार की नहरी पानी पर 1.4 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांग को राजस्थान ने गैरकानूनी करार दिया है।

पंजाब की 1.4 लाख करोड़ की रॉयल्टी मांग गैरकानूनी-राजस्थान सरकार
HighLights
पंजाब ने नहरी पानी के बदले 1.4 लाख करोड़ रुपये मांगे।
राजस्थान ने इस मांग को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया।
नदी जल को राष्ट्रीय संसाधन, व्यापारिक वस्तु नहीं माना।
जागरण संवाददाता, जयपुर। पंजाब सरकार की ओर से नहरी पानी के बदले 1.4 लाख करोड़ रुपये की मांग को राजस्थान ने गैरकानूनी बताया है। राजस्थान सरकार का तर्क है कि संबंधित राज्यों के बीच वर्ष 1955, 1959 और 1981 में हुए समझौतों में शुल्क का प्रावधान नहीं था।
भारत सरकार ने 1955 में रावी-व्यास नदी प्रणाली के पानी का अंतरराज्यीय आवंटन किया था। इसमें राजस्थान को 800 मिलियन एकड़ फीट पानी मिला था। इस व्यवस्था में रायल्टी देने का प्रावधान नहीं है। 1981 के समझौते के तहत रावी-व्यास नदी के अतिरिक्त पानी में से राजस्थान को 8.60 मिलियन एकड़ फीट आवंटित किया गया।
वर्ष 1920 में ब्रिटिश सरकार और बहावलपुर (अब पाकिस्तान में) तथा बीकानेर की तत्कालीन रियासत के बीच समझौता हुआ था। बीकानेर रियासत की करीब पांच लाख एकड़ जमीन के लिए पानी आवंटित किया गया। इसके बदले शुल्क ब्रिटिश सरकार को दिया जाता था, पंजाब प्रांत को नहीं।जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा कि राजस्थान पहले भी ऐसी मांग को गैरकानूनी बता चुका है।
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने बुधवार को अधिकारियों की बैठक में यही रुख दोहराया। अधिकारियों ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में हुई चर्चा पर भी विचार किया। राजस्थान के अधिकारियों के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 262 के तहत अंतरराज्यीय नदियों के पानी के उपयोग, वितरण और नियंत्रण संबंधी विवादों का नियमन संसद कर सकती है।
संवैधानिक व्यवस्था में नदी जल को व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधन माना जाता है।पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र में आजादी से पहले हुए समझौते का हवाला देकर राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रायल्टी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि पानी की एक-एक बूंद के लिए आवाज उठाएंगे और जरूरत पड़ी तो अदालत से सड़क तक लड़ेंगे।
