यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'घी से नहला देंगे, लेकिन पानी की बूंद भी नहीं देंगे', राजस्थान के इन गांवों में रातभर होती है कुओं की रखवाली
बाड़मेर में किसी के घर पानी खत्म हो जाता है तो पड़ोसी से उधार लेते हैं लेकिन उतना ही पानी ...और पढ़ें

HighLights
- बाड़मेर का तापमान 44.3 डिग्री पहुंचा
- यहां वर्षा का पानी सहेज कर रखा जाता है
- गांवों में पानी का पूरा हिसाब रखा जाता है
नरेंद्र शर्मा, जयपुर। पानी कितना कीमती है, यह जानना हो तो थार मरुस्थल में स्थित राजस्थान के बाड़मेर आइए, जहां के गांवों में लोग रात भर पानी की चौकीदारी करते हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट जिले के देरासर, रामसर, अभे का पर, सज्जन का पर, हिंदिया, गारडिया, रोहिड़ी, फागलिया, आड़ेल, सेतु सहित कई ऐसे गांव हैं, जहां पानी का पूरा हिसाब रखा जाता है।
पड़ोसी या रिश्तेदार को जितना पानी दिया जाता है, उससे उतना ही वापस लिया जाता है। ग्रामीण पड़ोसी को देशी घी देने को तैयार होते हैं, पानी नहीं। गर्मी शुरू होते इलाके में तपिश भी बढ़ने लगी है।
एकत्र करते हैं बारिश का पानी
10 अप्रैल को यहां का तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से काफी अधिक था। पानी की किल्लत से जूझते इन गांवों में घरों के निर्माण के पहले कुआं (स्थानीय भाषा में बेरियां) बनाया जाता है, जहां वर्षा का पानी सहेज कर रखा जाता है और जिसके सहारे पूरा साल निकालना होता है।
प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत पानी पहुंचाने का काम तेजी से हो रहा है। पिछली कांग्रेस सरकार ने रेगिस्तानी इलाकों में पानी पहुंचाने को लेकर कोई खास प्रयास नहीं किया।
- कन्हैयालाल चौधरी, जलापूर्ति मंत्री
जल जीवन मिशन के तहत बाड़मेर में काम हो रहा है, लेकिन इन गांवों के लोग योजना के बारे में जानते ही नहीं। यहां के लोग बेरियों के पानी से ही प्यास बुझाते हैं। यह कम पड़ा तो महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीण रतना राम ने कहा कि उन्हें रात में कुओं की पहरेदारी भी करनी पड़ती है, ताकि कोई पानी चोरी न कर ले। ग्रामीणों ने कहा कि पड़ोसी घी मांगता है तो दे देते हैं, लेकिन पानी देने में मुश्किल होती है।
