जयपुर, जेएनएन। Rajasthan Local Body Elections 2019. राजस्थान में भाजपा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर राज्य के निकाय चुनाव में ओछी हरकतें करने का आरोप लगाया है और सरकार के तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग को बर्खास्त करने की मांग की है। दरअसल, राजस्थान में निकाय चुनाव में पार्षदों को अपने पक्ष में करने की खींचतान महाराष्ट्र जैसा ही दृश्य पैदा का रही है। यहां भी पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए हर तरह के दांवपेच चल रहे हैं। दो दिन पहले अलवर में सरकार के श्रम मंत्री पर निर्दलीय पार्षदों को धमका कर अपने साथ ले जाने का आरोप लगा था।

उधर, भाजपा ने ब्यावर में दस निर्दलीय पार्षदों को अपने खेमे में शामिल कर लिया। वहीं, अध्यक्ष पद के नाम वापसी के दिन भरतपुर जिले के रूपवास नगरीय निकाय में एक निर्दलीय पार्षद को भाजपा ने सिंबल दिया और यह निर्विरोध चुन ली गई, लेकिन निर्वाचन के आधे घंटे के भीतर ही वह कांग्रेस में शामिल हो गई यानी बोर्ड पर कब्जे के बावजूद भाजपा को कुछ नहीं मिला। दरअसल, इस निकाय में भाजपा और कांग्रेस की बराबर सीटें हैं और निर्दलियों के हाथ में ही फैसला था। भाजपा ने एक निर्दलीय प्रत्याशी बबीता देवी के लिए समर्थन जुटाया। वे  निर्विरोध चुन भी ली गई और फिर कांग्रेस के खेमे चली गई।

इस घटना के बाद से भाजपा सरकार पर हमलावर है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इशारे पर ओछी हरकतों पर उतर आई है। भरतपुर जिले के रूपवास नगर पालिका के चेयरमैन के चुनाव में भाजपा के चुनाव चिह्न पर जीती हुई निर्विरोध नगर पालिका चेयरमैन बबीता खटीक को तकनीकी मंत्री सुभाष गर्ग एवं कांग्रेसी विधायक अमर सिंह जाटव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शेरसिंह सुपा एवं स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से अनुचित दबाव डालकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करवाई गई।

इस प्रकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं कांग्रेस के नेता लोकतंत्र की हत्या जैसे घृणित कार्य कर रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में पुलिस व जिला प्रशासन कांग्रेस के कार्यकर्ता की तरह कार्य कर रहा है। उनका कहना है कि भाजपा मंत्री सुभाष गर्ग व कांग्रेस के नेताओं की इस कार्यवाही का सड़क से लेकर सदन तक विरोध करेगी। उन्होंने मांग की कि राज्य चुनाव आयोग भी मंत्री सुभाष गर्ग व स्थानीय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करे।

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया एवं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि अभी नगर पालिका चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है तथा आचार संहिता लगी हुई है। उसके बावजूद राज्य सरकार के तकनीकी मंत्री सुभाष गर्ग का जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को साथ लेकर नगर पालिका रूपवास तक पहुंचना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और आचार संहिता का उल्लघंन है। हम चुनाव आयोग से मांग करते है कि मंत्री सुभाष गर्ग व स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्यवाही करे। डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि हम राज्यपाल से मांग करते हैं कि लोकतंत्र के हत्यारे मंत्री सुभाष गर्ग व स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त कर लोकतंत्र की रक्षा करें।

दरअसल, इस बार निकाय चुनाव में पार्षद के चुनाव और निकाय अध्यक्ष के चुनाव में पहली बार सात दिन का अंतर रखा गया है। भाजपा को डर है कि जैसा रूपवास में किया गया, वैसा ही अन्य निकायों मंे भी किया जा सकता है। दोनों चुनावों के बीच इतने समय को लेकर भाजपा पहले भी सवाल उठा चुकी है और अब 26 नवंबर को होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए और ज्यादा सतर्कता रखी जा रही है।

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Posted By: Sachin Mishra

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