जागरण संवाददाता, जयपुर। एक ओर जहां डिजिटल इंडिया की बात की जा रही है, वहीं आजादी के 70 साल बाद भी जोधपुर जिले के एक गांव में एक डाक घर ऐसा भी है जो झोपड़ी में चल रहा है। इस डाक घर की झोपड़ी का छप्पर कई बार तेज तूफान में उड़ भी जाता है।

दरअसल, राजस्थान में जोधपुर जिले की फलौदी तहसील के चाखू गांव में करीब 34 वर्ष पूर्व सितंबर,1983 में डाक घर खोला गया था। रेत के बीच यह डाक घर एक झोपड़ी में खोला गया था, तब से आज तक यह उसी झोपड़ी में चल रहा है। आसपास के 17 गांवों का यह एक मात्र डाक घर प्रति दिन खुलता भी नहीं है। यहां तैनात दो कर्मचारियों को 17 गांवों में डाक बांटना होता है, तो वे सप्ताह में दो दिन डाक बांटने का काम करते हैं और शेष तीन दिन झोपड़ी में रखी अपनी एक टेबल और दो लोहे के स्टूल पर बैठकर अपना कामकाज निपटाते हैं। इस झोपड़ी में ना तो बिजली है और ना ही पानी का प्रबंध है। दोनों कर्मचारियों को आसपास के घरों से पानी मांगकर अपना काम चलाना पड़ रहा है।

चाखू गांव के लोगों ने बताया कि आसपास के नारायणपुरा, करणी नगर, हनुमानसागर, बाबे का धोरा, पाबूपुरा, मटोल, शिवसागर, खैगासर, विश्वसर, मटोल टांका, करणी सागर आदि 17 गांवों के बीच यह एकमात्र डाक घर है। डाकघर के लिए पक्के कमरे के निर्माण के लिए कई बार ग्रामीणों ने जयपुर जाकर पोस्ट मास्टर जनरल से आग्रह किया, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय सांसद व विधायक से भी इस बाबत कई बार आग्रह किया। अब ग्रामीणों का कहना है कि आगामी चुनाव में उसी उम्मीदवार को वोट देंगे जो पक्के भवन निर्माण का वायदा करेगा।

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Posted By: Sachin Mishra

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