जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान सरकार ने अब सियागोश जैसे दुर्लभ जानवर के साथ ही भेड़ियों को बचाने को लेकर योजना बनाई है। राज्य के वन विभाग ने सियोगोश और भेड़ियों को बचाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है । इसके तहत वन विभाग उन इलाकों को चिन्हित कर रहा है जहां सियागोश की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। वहीं भेड़ियों के संरक्षण को लेकर वन विभाग के अधिकारियों को अलग से जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर ने बताया कि हमेशा कुछ प्रजातियों पर ही संरक्षण की दिशा टिकी होती है। लेकिन अब समय उन प्रजातियों पर भी फोकस करने का जो प्रशासनिक अनदेखी के कारण लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि सियागोश,भेड़िये, एव बिज्जू जैसे वन्यजीवों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की योजना तैयार की गई है। कुछ समय पूर्व रणथंभौर सेंचूरी में एक अध्ययन किया गया है,जिसमें सियागोश की संख्या मात्र 35 बताई गई है। इनकी गिनती के लिए कैमरा ट्रैप पद्धति का उपयोग किया गया । इसके तहत 5 माह में 215 लोकेशंस पर कैमरा ट्रैप लगाकर सियागोश को तलाशा गया। उन्होंने बताया कि रणथंभौर के अंदरूनी इलाकों में इनका मूवमेंट मिला है ।

अध्ययन के दौरान यह बात भी सामने आई कि रणथंभौर से आबादी और पशुओं का दबाव कम करने की जरूरत है । वन विभाग चिन्हित स्थानों पर रेगुलर मॉनिटरिंग करेगा और जैविक दबाव कम करने को लेकर प्रयास किए जाएंगे । रणथंभौर परियोजना के फील्ड डायरेक्टर मनोज पाराशर की अगुवाई में यह अध्ययन किया गया । उन्होने बताया कि सियागोश बिल्ली प्रजाति का एक दुर्लभ वन्यजीव है । यह देर रात बहुंत ही दबे पांव हरकत में आता है । वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार भेड़ियों की संख्या तो फिलहाल सही जानकारी में नहीं है,लेकिन इनके संरक्षण को लेकर अलग से वरिष्ठ अधिकारी कोे काम सौंपा गया है।

 

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