जयपुर, जागरण संवाददाता। Pak displaced Hindu. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित मिठी थारपारकर से छह साल पहले धार्मिक वीजा पर भारत आकर राजस्थान में जोधपुर और उसके आसपास बसे तीन परिवारों पर गुरुवार को उस समय विपत्ति आ गई, जब सीबीआइ व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें वापस पाक जाने का नोटिस थमा दिया। इन परिवारों के 19 में से तीन लोगों को वापस पाकिस्तान भेजे जाने को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इन परिवारों के शेष को फिलहाल पाक जाने का नोटिस नहीं दिया गया है। सीबीआइ और जिला कलेक्टर की तरफ से मिले नोटिस के बाद ये लोग परेशान है। अपने परिजनों के साथ छह साल पहले पाकिस्तान से जोधपुर आकर बसी काजल का तीन माह बाद यहीं विवाह होना तय हुआ है। लेकिन इसी बीच सीबीआइ और जिला कलेक्टर ने उसे वापस पाकिस्तान जाने का नोटिस दे दिया।

काजल का कहना है कि पाकिस्तान सुरक्षित नहीं है, ऐसे में मैं चाहे मर जाऊगीं, लेकिन पाकिस्तान नहीं जाऊंगी। काजल के अन्य परिजनों को फिलहाल पाकिस्तान जाने के लिए नहीं कहा गया है। चार बच्चों की मां पाक विस्थापित परमेश्वरी के पति रामदयाल को पाकिस्तान जाने के लिए कहा गया है, लेकिन उसे और बच्चों को इस बारे में नोटिस नहीं दिया गया। परमेश्वरी का कहना है कि अब अगर पति पाकिस्तान चला गया तो वह चार बच्चों के साथ यहां किस के सहारे रहेगी, बच्चों का पालन-पोषण कैसे करेगी।

परमेश्वरी ने कहा कि अगर मेरे पति को जबरन पाकिस्तान भेजा गया तो पूरा परिवार आत्महत्या करने की स्थिति में आ जाएगा। इन लोगों का कहना है कि अगर अपने वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया है तो जेल भेज दो,लेकिन पाकिस्तान मत भेजो। वे किसी भी हालत में पाकिस्तान वापस नहीं जाएंगे।

पाक विस्थापितों के लिए काम करने वाली संस्था सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढ़ा का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बावजूद जिला कलेक्टरों के स्तर पर पाक विस्थापितों को नागरिकता देने में देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अत्याचारों से परेशान हो कर ये लोग यहां आए थे, अब इन्हें फिर वहां भेजा जा रहा है।

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Posted By: Sachin Mishra

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