जयपुर, जेएनएन। राजस्थान की मौजूदा कांग्रेस ने पिछली सरकार के एक और फैसले को बदलते हुए प्रदेश के 251 मार्गों पर सिर्फ राजस्थान रोडवेज की बसें चलाने का फैसला किया है। हालांकि बताया जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर मार्ग ऐसे हैं, जहां निजी बस संचालक ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे थे।

राजस्थान में बसों के संचालन के लिए 476 मार्ग हैं। भाजपा सरकार ने इन सभी मार्गों को डिनोटिफाई कर दिया था अर्थात इन पर सरकारी के साथ ही निजी बसों को भी परमिट दे दिए गए थे। भाजपा सरकार ने अपने समय में लोक परिवहन सेवा के नाम से निजी बसों के संचालन की अनुमति दी थी। भाजपा सरकार लोक परिवहन सेवा के लिए करीब डेढ हजार परमिट जारी कर गई थी। उस समय इसका काफी विरोध हुआ था और इसे रोडवेज को बंद करने के कदम के रूप में देखा गया था। रोडवेज कर्मचारियों की ओर से इसका विरोध अभी भी जारी है, क्योंकि मौजूदा सरकार ने लोक परिवहन सेवा को बंद नहीं किया है। हालांकि अब मौजूदा सरकार ने 476 में से 251 मार्गों पर नए परमिट जारी नहीं करने का फैसला किया है और तय किया है कि इन मार्गों पर सिर्फ रोडवेज की बसें ही चलेंगी।

राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम को मजबूत करने व ग्रामीण बस सेवा के रूप में प्रदेश की जनता को सस्ती सुलभ परिवहन सुविधा प्रदान करने के लिए यह निर्णय किया गया है। उन्होेंने बताया कि लोक परिवहन सेवा के लिए नए परमिट जारी नहीं किए जा रहे हैं। इन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। खाचरियावास ने बताया कि अब 251 मार्गों पर अब सरकारी बसें ही चलेंगी। इन पर दिए गए परमिटों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा और नए परमिट नहीं दिए जाएंगे।

परिवहन मंत्री ने माना कि तीन साल में भी इन मार्गों पर निजी वाहन संचालक ज्यादा रुच नहीं ले रहे हैं और ज्यादा बसें नहीं चल रहे हैं। कुछ ने पहले लिए परमिट सरेंडर कर दिए हैं। खाचरियावास ने बताया कि जो 225 मार्ग शेष रह गए हैं, उन पर भी नए परमिट जारी नहीं किए जाएंगे। ऐसे में इन मार्गों पर भी निजी बसों के परमिट की अवधि समाप्त होने पर सिर्फ सरकारी बसें ही चलेगी। दरअसल, राजस्थान रोडवेज बहुत घाटे में चल रही है और सरकार इसे फायदे में लाने की कोशिश में जुटी है। हालांकि रोडवेज कर्मचरी यूनियन से जुडे एमएल यादव का कहना है कि इससे बहुत ज्यादा फायदा नहीं होगा। सरकार को तुरंत सभी तरह की निजी बसों को बंद करना चाहिए, तब रोडवेज में जान आएगीं।

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Posted By: Sachin Mishra

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