जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान के नाथ संप्रदाय के लोग अपनी पुरानी परंपरा के चलते मृतकों का घर में ही अंतिम संस्कार करने को मजबूर है। राजस्थान के नाथ संप्रदाय के लोगों को मुक्तिधामों में समाधी बनाने की जगह न मिलने के कारण उन्हें घर में ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है।

दरअसल, नाथ संप्रदाय में मौत के बाद समाधि देने की पंरपरा है, लेकिन मुक्तिधामों में उन्हें समाधी बनाने नहीं दी जाती है। कई लोग इसका विरोध करते है,इस कारण से ये लोग अपने ही घर में समाधी बनाने को मजबूर है । कोटा के लाडपुरा के कर्बला इलाके में रहने वाले दयाशंकर योगी की मौत कुछ वर्ष पहले हुई थी। उनकी मौत के बाद जब कहीं और उन्हें दफन करने की जगह नहीं मिली तो परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार अपने ही घर के आंगन में करते हुए समाधी बना दी।

वहीं, समाज के एक अन्य परिवार की घर के अंदर एक खुले हिस्से में दादा-दादी और एक तरफ उनके पूर्वजों की समाधी बनी हुई है। जब इनकी मौत हुई तो परिजनों ने अपने घर में ही इनका अंतिम संस्कार कर दिया और इन्हें घर के अंदर ही समाधी दे दी। समाधियों के ऊपर शिवलिंग की स्थापना की गई है।

नाथ संप्रदाय के लोग शिव के उपासक माने जाते हैं और इसलिए उनकी समाधियों पर शिव परिवार की स्थापना करने की मान्यता है। कोटा में नाथ समाज के लगभग प्रत्येक घर में पूर्वजों की ऐसी समाधियां देखी जा सकती है। जिन घरों में जगह नहीं उनमें तो कमरों तक में ये समाधियां बनाई गईं है।

कोटा के कुन्हाड़ी, लाडपुरा और बोरखेड़ा इलाके में इन नाथ समाज के लोगों की ऐसी कई समाधियां है जो घरों में है ।घर में अंतिम संस्कार करने पर इलाके के लोगों का प्रतिशोध भी इस समाज के लोगों द्वारा झेलना पड़ता है । मौहल्ले के लोग घर में मुर्दे को दफन करने का विरोध करते है ।  

Posted By: Preeti jha