जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान में श्रीगंगानगर के अनूपगढ़ कस्बे से आठ किलोमीटर दूर स्थित है छोटा सा गांव बिन्जौर। यहां बनी है प्रसिद्ध प्रेमी युगल लैला-मजनूं की मजार। यह मजार प्रेमी युगलों के लिए किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है। यहां दूर-दूर से प्रेमी जोड़े और अन्य लोग अपनी खुशियां मांगने आते है। यहां प्रतिवर्ष दो दिवसीय मेला लगता है। इस साल रविवार को दो दिवसीय मेला संपन्न हुआ। मेले के दौरान मजार पर माथा टेकने के लिए वे भीषण गर्मी में भी लोग लाइन लगाकर घंटों यहां खड़े रहे।

यह है यहां का इतिहास

यह गांव दिखने में छोटा है, लेकिन इसकी पहचान बड़ी है। बताया जाता है कि इसी छोटे से गांव में प्रेमी युगल के रूप में अमिट छाप छोड़ने वाले लैला-मजनूं ने अंतिम सांस ली थी। हालांकि इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है, लेकिन इस मान्यता के चलते यहां प्रेमी जोड़ों का यहां आना लगातार जारी रहता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में महिला-पुरुष अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना के साथ श्रद्धा के फूल चढ़ाते है। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस व होमगार्ड के जवान तैनात रहते है।

ग्रामीणों के अनुसार लैला-मजनूं की मजार काफी पुरानी है। मेला कमेटी अध्यक्ष जरनैल सिंह सहित अन्य सदस्य इस मेले की व्यवस्थाएं संभालते है। क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार वे साल 1962 से बिंजोर गांव में रह रहे है, तब यहां पूरे क्षेत्र में जंगल था। घग्घर नदी में आने वाली बाढ़ के दिनों में लैला-मजनूं की मजार के चारों ओर भारी मात्रा में पानी भर जाने के बावजूद भी मजार में पानी नहीं जा पाता था । साल 1972 के बाद इस मजार की मान्यता बढ़ गई और यहां मेला लगने लगा जो अभी तक जारी है।  

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Posted By: Preeti jha

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