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60 से अधिक लोगों को बांग्लादेश से जयपुर लाया मुर्तजा, 22 से 25 लाख में बेची किडनी; बदले में सिर्फ इतने रुपये दिए

Jaipur Kidney Case जयपुर के किडनी कांड में बड़ा खुलासा हुआ है। आठ महीने मास्टरमाइंड मुर्तजा बांग्लादेश से 60 से अधिक लोगों को जयपुर ला चुका था। इन लोगों को पहले कोलकाता और बाद में गुरुग्राम के रास्ते जयपुर लाया जाता था। किडनी के बदले सिर्फ दो से तीन लाख रुपये लोगों को आरोपी देता था। मुर्तजा अभी फरार चल रहा है।

By Jagran News Edited By: Ajay Kumar Tue, 09 Jul 2024 08:48 PM (IST)
जयपुर के किडनी कांड में बड़ा खुलासा। (सांकेतिक फोटो)

जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में फर्जी एनओसी से अंग प्रत्यारोपण के मामले की जांच लगातार जारी है। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की अब तक की जांच में सामने आया कि किडनी रैकेट चलाने वाला मास्टरमाइंड मो. मुर्तजा ने बांग्लादेश के 60 से अधिक गरीबों को आठ महीने में जयपुर भेजा था।

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दो से तीन लाख में होता था सौदा

जांच में यह भी सामने आया है कि इन लोगों को किडनी देने के बदले दो से तीन लाख रुपये मिलते थे। वहीं मरीज से 22 से 25 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। नियमों के अनुसार किडनी दान करने वाले और मरीज के बीच खून का रिश्ता होना आवश्यक है। मगर इस रैकेट ने जितने भी लोगों से किडनी दिलवाई और जिन्हे प्रत्यारोपित की गई वे एक-दूसरे को जानते ही नहीं थे।

अब तक 14 लोग गिरफ्तार

यह गिरोह बांग्लादेश से दिल्ली और जयपुर तक सक्रिय था। जयपुर के फोर्टिस और ईएचसीसी अस्पताल के चिकित्सकों से रैकेट का संपर्क था। एसीबी ने दोनों अस्पतालों में चिकित्सकों व प्रशासन से जुड़े कर्मचारियों और रैकेट के सात लोगों समेत 14 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है।

ऐसे जारी होती थी फर्जी एनओसी

आधिकारिक रूप से तो इस मामले की जांच अब बंद कर दी गई। मगर एसीबी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि जयपुर स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह 30 से 45 हजार रुपये में फर्जी एनओसी देता था। दोनों निजी अस्पतालों के चिकित्सक फर्जी एनओसी के बदले गौरव को पैसा देते थे।

मुर्तजा अब भी फरार

एसीबी की जांच में सामने आया कि बांग्लादेश दूतावास में किडनी देने वालों और प्रत्यारोपित करवाने वालों से ज्यादा पूछताछ नहीं होती थी। केवल उनसे नाम, पता व जाने का शहर पूछा जाता था। रैकेट का मास्टरमाइंड मुर्तजा अब भी फरार है। जिन लोगों को किडनी प्रत्यारोपित की गई उनमें से कई ने एसीबी को बताया कि बांग्लादेश अथवा भारत के किसी अन्य शहर में किडनी प्रत्यारोपण के 45 लाख रुपये तक लगते हैं, जबकि जयपुर में अधिकतम 25 लाख रुपए में ही काम हो जाता था।

पहले कोलकाता और बाद में गुरुग्राम लाते थे

जानकारी के अनुसार मुर्तजा लोगों को बांग्लादेश से पहले कोलकाता और फिर गुरुग्राम लाता था और इसके बाद जयपुर लाया जाता था। किडनी प्रत्यारोपण के बाद देने वाले और जिनके प्रत्यारोपण किया जाता था, उन्हे जयपुर के ही अलग-अलग फ्लैट में कुछ दिन रखा जाता था। बाद में उन्हे गुरुग्राम भेज दिया जाता था।

कमेटी की बैठक के बिना दी एनओसी

राज्य सरकार ने एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों डॉ. अचल शर्मा और डॉ. राजीव बगरहट्टा की कमेटी बना रखी थी। लेकिन इन्होंने कमेटी की बैठक ही नहीं की। इस बात का लाभ उठाते हुए निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने गौरव से मिलकर फर्जी एनओसी जारी करवाई थी।

तीन को किया गया बर्खास्त

मामले का खुलासा होने के बाद सरकार ने शर्मा व बगरहट्टा के साथ ही राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुधीर भंडारी को बर्खास्त कर दिया। पिछले दिनों नई कमेटी गठित की है। दरअसल, 31 मार्च की रात को एसीबी ने एसएमएस अस्पताल में पैसे लेकर फर्जी एनओसी देने वाले गौरव सिंह और ईएचसीसी अस्पताल के कर्मचारी अनिल जोशी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने पूरे रैकेट का खुलासा किया था।

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