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Jal Jeevan Mission Scam: ईडी ने राजस्थान के 'जल जीवन मिशन' मामले में नई गिरफ्तारी की, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत हुई कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजस्थान में जल जीवन मिशन योजना को लागू करने में कथित अनियमितताओं से संबंधित धनशोधन जांच के सिलसिले में एक नई गिरफ्तारी की है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के संचालक पदमचंद जैन को धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है।

By Jagran News Edited By: Siddharth Chaurasiya Fri, 14 Jun 2024 02:56 PM (IST)
Jal Jeevan Mission Scam: ईडी ने राजस्थान के 'जल जीवन मिशन' मामले में नई गिरफ्तारी की, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत हुई कार्रवाई
जल जीवन मिशन का उद्देश्य घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

पीटीआई, नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजस्थान में 'जल जीवन मिशन योजना' को लागू करने में कथित अनियमितताओं से संबंधित धनशोधन जांच के सिलसिले में एक नई गिरफ्तारी की है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के संचालक पदमचंद जैन को धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है।

जेजेएम घोटाले में पहले भी हो चुकी गिरफ्तारी

केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए जल जीवन मिशन (जेजेएम) का उद्देश्य घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है और इसे राजस्थान में राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य आभियांत्रिकी (पीएचई) विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। जांच एजेंसी ने इससे पहले साल की शुरुआत में पीयूष जैन नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

ईडी का धनशोधन मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी पर आधारित है जिसमें आरोप लगाया गया था कि पदमचंद जैन, महेश मित्तल (श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के संचालक), पीयूष जैन और अन्य लोग सार्वजनिक स्वास्थ्य और आभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) से विभिन्न निविदाओं की प्राप्ति के संबंध में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने में शामिल थे।

ईडी का क्या है आरोप?

एजेंसी ने पहले जारी एक बयान में आरोप लगाया कि संदिग्ध अपने ठेकों/अनुबंधों में उपयोग करने के लिए हरियाणा से ‘चोरी’ का सामान खरीदने में भी शामिल थे और उन्होंने पीएचईडी के अनुबंध प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इरकॉन के ‘फर्जी’ कार्य समापन पत्र भी जमा किए थे।

ईडी ने दावा किया था कि कई बिचौलियों और प्रॉपर्टी डीलर ने जल जीवन मिशन से धन का गबन करने में राजस्थान सरकार के पीएचई विभाग के अधिकारियों की मदद की थी। जांच में पाया गया कि पदमचंद जैन और महेश मित्तल 'इरकॉन द्वारा जारी किए गए कथित फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और वरिष्ठ पीएचईडी अधिकारियों को रिश्वत देकर' जेजेएम कार्यों से संबंधित निविदाएं हासिल करने में शामिल थे।

ईडी ने कहा था कि पीयूष जैन इन आरोपी फर्मों के मामलों का 'प्रबंधन' कर रहा था और उसे लगभग 3.5 करोड़ रुपये भी मिले थे, जो इस मामले में अपराध की आय के अलावा और कुछ नहीं थे।