उदयपुर, जागरण संवाददाता। समूचा विश्व रविवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है। इस दिन वे लोग भी योग करते हैं जो आमतौर पर योग नहीं कर पाते। किन्तु उदयपुर में एक आदियोगी समूह है जो विशिष्ट तरीके से दैनिक रूप से योग कराता है। योग करने से पहले वह मिट्टी का लेप अपने शरीर पर लगाते हैं और उसके बाद ही योग का अभ्यास करते हैं। यह लेप भी खास होता है जिसे बारह तरीके की मिट्टी से मिलाकर तैयार किया जाता है।

उदयपुर के आदियोगी समूह के संस्थापक एवं योग विषय को लेकर शोध में जुटे जसवंत मेनारिया हैं, जो पिछले सात साल में सैकड़ों युवाओं को योग में पारंगत कर चुके हैं। उनमें से कुछ तो देश के विभिन्न हिस्सों में योग प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वे कहते हैं कि मिट्टी के लेप लगाकर किया गया योग प्राकृतिक चिकित्सा एक तरीका है। मेनारिया बताते हैं कि प्राचीन काल से ही गर्मी के मौसम में मिट्टी का लेप लगाकर या ठंडे पानी में योग क्रिया की जाती है। योग की इस प्रक्रिया से व्‍यक्‍ति के शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और साथ ही उसके शरीर की अशुद्धियां भी बाहर निकल जाती हैं। शरीर के रोम छिद्र खुलने से मस्तिष्क को भी शिथिलता मिलती है। त्वचा को भी मिट्टी के लेप से लाभ मिलता है।

वह बताते हैं कि मिट्टी के लेप लगाने के बादवह ग्यारह तरीके से अलग-अलग आसनों का प्रशिक्षण देते हैं। योग प्रक्रिया संपन्न होने के बाद सामान्य प्रेशर से पानी डालकर लेप को धोया जाता है। मिट्टी का लेप एक तरह की थैरेपी भी है। शरीर भी जिन पांच तत्वों से बना है उनमें एक तत्व मिट्टी है। जो शरीर को शीतल तथा निरोगी बनाता है। विदेशों में भी इस तरह के योग के प्रति लोगों का रूझान बढ़ा है, जहां इसे मड़ बाथ कहा जाता है। उदयपुर में सिटी पैलेस रोड पर प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में मिट्टी का लेप लगाकर योग का प्रशिक्षण नित्य दिया जाता है।

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