जागरण संवाददाता, जयपुर। Indian Army. भारतीय सेना की सबसे ताकतवर-21 स्ट्राइक कोर पांच दिन तक पाकिस्तान से सटे बाड़मेर में युद्धाभ्यास करेगी। बुधवार से शुरू होने वाला यह युद्धाभ्यास 18 नवंबर तक चलेगा। युद्भाभ्यास में सेना के 40 हजार जवान अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इसमें पहली बार शूटर ग्रिड सेंसर का प्रयोग किया जाएगा। युद्धाभ्यास के दौरान चंद घंटों में दुश्मन के इलाकों को कब्जा करने का पराक्रम जवान दिखाएंगे। छह दिन तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास में जवान लगातार 12 घंटे तक युद्ध करने का कौशल दिखाएंगे।

पिछले तीन माह से अब तक पोकरण क्षेत्र के आसपास युद्धाभ्यास में फायर पावर का संयुक्त अभ्यास चल रहा था। लेकिन अब पाकिस्तान से सटे बाड़मेर में युद्धाभ्यास हाेगा। युद्धाभ्यास के दौरान टैंक और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों से जमीनी लड़ाई लड़ने के साथ ही युद्ध जीतने के लिए हवाई ताकत का भी प्रयोग किया जाएगा। हवाई ताकत का अभ्यास करने के लिए जोधपुर एयरबेस से लड़ाकू विमान उड़ान भरेंगे और अपने टारगेट को निशाना बनाएंगे।

युद्धाभ्यास में वायुसेना के सुखोई, मिग, जगुआर और रूद्र दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को ध्वस्त करेंगे।रक्षा प्रवक्ता कर्नल सोम्बित घोष का कहना है कि 13 से 18 नवंबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास में सेना के जवान अपनी ताकत का प्रदर्शन जोश के साथ करेंगें। थल सेना के साथ वायुसेना का भी सामंजस्य होगा। 

गौरतलब है कि इससे पहले बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में इन दिनों भारतीय सेना की सदन शक्ति कमान कर सिख रेजिमेंट के सैनिक और फ्रांसीसी सेना की बख्तरबंद ब्रिगेड के समुद्री इफ्रेंटी रेजिमेंट के सैनिक संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहे हैं। रविवार को युद्धाभ्यास के चौथे दिन दोनों देशों के सैनिकों ने अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। संयुक्त युद्धाभ्यास का उद्घाटन 31 अक्टूबर को हुआ था। युद्धाभ्यास का सप्त शक्ति 2019 नाम दिया गया है। फ्रांसीसी सेना के 38 सैनिक भारतीय सैनिकों के साथ मिलकर एक-दूसरे से युद्ध कौशल सीखने में जुटे। इस युद्धाभ्यास के दौरान काउंटर टेररिज्म को लेकर विशेष योजना पर काम किया जा रहा है।

इस दौरान प्रतिभागी संयुक्त योजना, घेरा और खोज अभियान, खोज और बचाव, संयुक्त सामरिक अभ्यास और विशेष हथियार कौशल की मूल भावना जैसे विषयों पर दोनों देशों के सैनिक काम कर रहे हैं। सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, संयुक्त युद्धाभ्यास का मुख्य मकसद दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और सैन्य संबंधों को मजबूत करना है। यह युद्धाभ्यास संयुक्त राष्ट्र के तहत आतंकी खतरे का मुकाबला करने के लिए पल्टन स्तर पर संयुक्त अभ्यास चलाने में मदद करेगा। 

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Posted By: Sachin Mishra

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