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ट्रेनों की लेट-लतीफी पर लगेगी लगाम, हावड़ा मंडल में आधुनिक डिजिटल सेंसर से लैस हो रहा सिग्नलिंग सिस्टम

Published: Sun, 01 Nov 2026 10:38 PM (IST)

हावड़ा-बर्द्धमान कर्ड सेक्शन में सिग्नलिंग प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है ताकि ट्रेन परिचालन में देरी कम हो और ...और पढ़ें

हावड़ा रेल मंडल में मजबूत की जा रही है सिग्नलिंग प्रणाली (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

हावड़ा रेल मंडल में मजबूत की जा रही है सिग्नलिंग प्रणाली (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. सिग्नलिंग प्रणाली में सुधार से ट्रेन देरी कम होगी।

  2. फ्राउशर प्रणाली से तकनीकी खराबी दूर कर सुरक्षा बढ़ी।

  3. हावड़ा-बर्द्धमान सेक्शन में निर्बाध परिचालन सुनिश्चित किया जा रहा।

जागरण संवाददाता, कोलकाता । हावड़ा-बर्द्धमान कर्ड सेक्शन के प्रमुख स्टेशनों और आटोमैटिक सिग्नलिंग खंडों में सिग्नलिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने तथा वैकल्पिक प्रणाली विकसित करने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं।

इसका उद्देश्य ट्रेन परिचालन में देरी कम करना और यात्री सुरक्षा बेहतर बनाना है। तकनीकी सुधारों से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और आरामदायक सफर मिलने की उम्मीद है।

रेल सूत्रों के अनुसार, पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय के नेतृत्व और रणनीतिक मार्गदर्शन में बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों को दूर करने तथा निर्बाध परिचालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं।

हावड़ा रेल मंडल के प्रबंधक विशाल कपूर ने बताया कि संवेदनशील स्थलों पर परिसंपत्तियों में सुधार के साथ समानांतर वैकल्पिक प्रणालियां लगाई जा रही हैं। चेराग्राम-शक्तिगढ़ आटोमैटिक सिग्नलिंग सेक्शन में आटो हट संख्या 15 से 26 तक पहले से लगी मेधा मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर प्रणालियों के समानांतर फ्राउशर प्रणाली स्थापित करने का कार्य जारी है।

डीआरएम ने कहा कि डिजिटल एक्सल काउंटर और आटोमैटिक सिग्नलिंग ट्रैक पर ट्रेन की मौजूदगी का पता लगाकर यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई ट्रेन पहले से व्यस्त रेलखंड में प्रवेश न करे।

सेंसर में खराबी आने पर सुरक्षा प्रक्रिया के तहत सिग्नल स्वतः लाल हो जाते हैं। ऐसे में ट्रेन को रोकना पड़ता है और फिर प्रतिबंधित गति से आगे बढ़ाया जाता है, जिससे परिचालन प्रभावित होता है और यात्रियों को देरी तथा असुविधा का सामना करना पड़ता है।

समानांतर प्रणाली और नए ट्रैक सेंसरों से एक सर्किट में खराबी आने पर दूसरी प्रणाली कार्यभार संभाल सकती है। सुरक्षा शर्तें पूरी होने पर इससे ट्रेन को अनावश्यक रूप से रोकने की जरूरत घटेगी और परिचालन सामान्य सिग्नल संकेतों के अनुरूप सुचारु रह सकेगा।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि इन उपायों से सिग्नल संबंधी खराबियां कम होंगी और यात्रा अधिक समयबद्ध तथा भरोसेमंद बनेगी।

अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2026 के बीच मेधा प्रणाली में कुल 227 खराबियां दर्ज हुईं थीं। इनमें वर्ष 2024-25 में 79, 2025-26 में 96 और 2026-27 के पहले सात महीनों में 52 खराबियां शामिल हैं।

प्रतिमाह औसतन 7 से 8 खराबियों से प्रणाली कुल 270 घंटे प्रभावित रही और 199 ट्रेनों का परिचालन बाधित हुआ। 18 अगस्त 2026 को आटो हट-15 में समानांतर फ्राउशर प्रणाली शुरू होने के बाद खराबियां 30 से घटकर शून्य हो गईं।

आटो हट-26 में समानांतर प्रणाली की स्थापना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। वहां पहले 28 खराबियां दर्ज हुई थीं। शेष आटो हटों में भी काम जारी है।

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