जयपुर, जागरण संवाददाता। ऑनलाइन खुदरा कंपनियां (ई-कॉमर्स) फ्लिपकार्ट,अमेजन और पेटीएम पर एफडीआई नियमों के उल्लंघन के आरोप मामले में मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ में सुनवाई हुई। कॉन्फ़िगरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन द्वारा पेश की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दिनेश मेहता की कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यूनियन की तरफ से पक्ष रखते हुए वकील राजवेंद्र सारस्वत और अबीर रॉय ने कोर्ट को बताया कि यह कंपनियां एफडीआई के नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रही है। कंपनियों द्वारा मार्केट पर कब्जा जमाने के उद्देश्य से लॉस्ट फंडिंग कर लोगों को 80 से 90 फीसदी तक डिस्काउंट दिया जा रहा है। कंपनियां अपने उत्पाद को अपने प्लेटफार्म के माध्यम से बेच रही हैं, जो कि एफडीआई के नियमों का खुला उल्लंघन है।

याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि कंपनियां लगातार घरेलू बाजार को नुकसान पहुंचा रही है और सरकार इस पर कोई एक्शन नहीं ले रही है। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 14 अक्टूबर को जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी। वकील राजवेंद्र सारस्वत और अबीर रॉय ने कोर्ट को बताया कि पिछले साल इन कंपनियों को करीब साढ़े सात हजार करोड़ का नुकसान हुआ। लेकिन बाजार पर कब्जा जमाने के उद्देश्य से इस नुकसान को वहन कर लिया।

उदाहरण देते हुए अधिवक्ता ने बताया कि जिस तरह से पहले बुक स्टॉल पर किताबें बिकती थी, लेकिन ऑनलाइन कंपनियों ने 50 से 60 फ़ीसदी डिस्काउंट देते हुए किताबे बेचना शुरू किया अब धीरे-धीरे घरेलू बाजार से बुक स्टॉल खत्म हो गई और अब कंपनियों ने डिस्काउंट देना बंद कर दिया। कंपनियों का उद्देश्य घरेलू बाजार को तहस-नहस कर देना है । घरेलू बाजार को खत्म कर पूरे बाजार पर एकाधिकार स्थापित करने के उद्देश्य से इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे है जो कि एफबीआई के नियमों का खुला उल्लंघन है।याचिका में इन कंपनियों का देश में कामकाज बंद करने का आग्रह किया गया है। 

Posted By: Preeti jha

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