जयपुर, जागरण संवाददाता। फीस, कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म और बस के किराये के नाम पर निजी स्कूलों की फीस की मनमानी पर रोक लगाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के अलग-अलग जजों ने डेढ़ दशक में 12 आदेश दिए हैं। लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए राज्य सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोक कदम नहीं उठाया गया। कोर्ट के आदेश के बाद लगातार कमेटियां बनाकर खानापूर्ति कर ली गईं। निजी स्कूलों की फीस व अन्य मामलों में मनमानी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का पहला फैसला 14 साल पहले आया था।

इसके बाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई बार निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने को लेकर आदेश दे चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने को लेकर 14 साल पहले हाईकोर्ट द्वारा गठित जस्टिस पीके तिवाड़ी की रिपोर्ट पर राज्य सरकार अमल नहीं कर पाई है। हाईकोर्ट के आदेश पर साल, 2013 में बने फीस नियंत्रण कानून का भी सही तरीके से पालन नहीं हो सका है।

कोर्ट में इस तरह चला मामला

साल, 2002 में सामाजिक कार्यकर्ता संघी ने फीस को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद फरवरी, 2004 में पूर्व न्यायाधीश पीके तिवाड़ी की अगुवाई में कमेटी बनाकर फीस नियंत्रण को लेकर रिपोर्ट देने के लिए कहा। साल, 2005 में कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट दी। साल, 2006 में कमेटी की रिपोर्ट के पालना को लेकर हाईकोर्ट में फिर एक याचिका दायर हुई। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका पर सरकार का जवाब आने तक फीस वृद्धि पर रोक लगाई। अगस्त, 2009 में स्कूल फीस बढ़ाने पर रोक के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। साल, 2013 में फीस नियंत्रण के लिए कानून बनाया और पूर्व न्यायाधीश शिवकुमार शर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई।

इस कमेटी को निजी स्कूलों की फीस से जुड़े मामलों को देखने का जिम्मा सौंपा गया। साल,2014 में हाईकोर्ट ने सरकार से फीस नियंत्रण के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कहा। इसके बाद साल, 2016 में सरकार ने फीस नियंत्रण कानून बदल दिया और फीस निर्धारण के लिए राज्य स्तर पर कमेटी बनाने के बजाय स्कूल स्तर पर कमेटी गठित करने का प्रावधान किया। इसके बाद फिर अगस्त, 2019 में हाईकोर्ट में फिर यह मामला पहुंचा तो सरकार को फीस नियंत्रण के लिए कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

प्रदेश की स्कूलों में फीस नियंत्रण को लेकर सुनवाई करने वाले 12 में से 11 जज सेवानिवृत हो गए, लेकिन फिर भी अभिभावकों को पूरी तरह से राहत नहीं मिल सकी है। निजी स्कूलों की फीस को लेकर हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अनिल सिंह देव, केएस राठौड़, वाईआर मीणा, ज्ञानसुधा मिश्रा, सुनील अंबवानी, जेके रांका, संगीत लोढ़ा, पीके लोहरा, जीएस सिंघवी व बीएन अग्रवाल सुनवाई कर चुके हैं। इनमें से अब एकमात्र संगीत लोढ़ा ही सेवारत है,शेष सेवानिवृत हो गए। 

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Posted By: Sachin Mishra

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