जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने साढ़े चार साल से भी अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया,लेकिन सरकार के आधे कैबिनेट मंत्रियों और संसदीय सचिवों को उन्हे मिलने वाले विवेकाधीन कोष के बारे में जानकारी नहीं है।

वसुंधरा सरकार के 11 कैबिनेट मंत्रियों और 6 संसदीय सचिवों ने विवेकाधीन कोष का उपयोग नहीं किया है। "दैनिक जागरण " ने जब 4 कैबिनेट मंत्रियों और 3 संसदीय सचिवों से विवेकाधीन कोष का अब तक उपयोग नहीं करने पर बात की तो उन्होंने इस तरह के किसी कोष की जानकारी होने से ही इंकार कर दिया। हैरानी की बात यह है कि इन मंत्रियों और संसदीय सचिवों ने साढ़े चार साल से अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया,लेकिन वे इस तरह के किसी कोष के बारे में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहते है अधिकारियों ने हमें इस बारे में बताया ही नहीं।

वित्त एवं सामान्य प्रशासन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सरकार के जिन 11 मंत्रियों ने अपने विवेकाधीन कोष का उपयोग नहीं किया उनमें जनजाती क्षेत्रीय विकास मंत्री नंदलाल मीणा,कृषमंत्री प्रभुलाल सैनी,परिवहन मंत्री युनूस खान,राजस्व मंत्री अमराराम,खाघ एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बाबूलाल वर्मा,जल संसाधन मंत्री डॉ.रामप्रताप,जलदाय मंत्री सुरेन्द्र गोयल,श्रम मंत्री जसवंत यादव,स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी,उधोग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत,सामान्य प्रशासन मंत्री हेम सिंह भड़ाना आदि शामिल है । वहीं संसदीय सचिवों में लादूराम विश्नोई,सुरेश सिंह रावत,कैलाश वर्मा,ओमप्रकाश हुडला,विश्वनाथ मेघवाल और नरेन्द्र नागर ने विवेकाधीन कोष का उपयोग नहीं किया ।

कैबिनेट मंत्री मीणा और गोयल बोले,कोष की हमें जानकारी नहीं

कैबिनेट मंत्री नंदलाल मीणा और जसवंत यादव का कहना है कि विवेकाधिन कोटा क्या होता है,इस बात की जानकारी नहीं है । हमें तो फंड के बारे में अधिकारियों ने बताया ही नहीं । दोनों मंत्रियों ने कहा,अब हम मुख्य सचिव से बात करेंगे कि अधिकारियों ने हमें बताया क्यों नहीं ।बाबूलाल वर्मा एवं हेम सिंह भड़ाना ने भी कोष के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही ।

संसदीय सचिव विश्नोई ने कहा,पहली बार नाम सुना है

संसदीय सचिव लादूराम विश्नोई ने कहा कि,इस तरह के किसी कोष का नाम ही आज सुना है। मुझे तो हर माह वेतन मिलता है,उसी का उपयोग करता हूं। विधायक कोष का उपयोग विकास कार्यों में करता हूं। संसदीय सचिव नरेन्द्र नागर एवं कैलाश वर्मा ने कहा,अब पता चला है ।

यह होता है विवेकाधीन कोष

कैबिनेट मंत्रियों को 2 लाख और संसदीय सचिवो को 1 लाख रूपए प्रतिवर्ष विवकाधीन कोष मिलता है । इससे वे जरूरतमंदों की सहायता कर सकते है। इस कोष से जिस परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी ना हो उसे और स्टूडेंट्स को पढ़ाई के लिए दिया जाता है। यह कोष विधायक कोष से अलग होता है ।  

Posted By: Preeti jha