जयपुर। विश्व के सबसे बडे आध्यात्मिक संगठनों में से एक ब्रह्माकुमारी संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी का 104 वर्ष की उम्र में बीती रात दो बजे निधन हो गया। दादी जानकी स्वच्छ भारत मिशन की ब्रांड एम्बेसडर भी थी। राजस्थान के सिरोही जिले में माउण्ट आबू के ग्लोबल हास्पिटल में उपचार के दौरान उनका निधन हुआ। दादी जानकी दुनिया की एकमात्र महिला थीं, जिन्हें मोस्ट स्टेबल माइंड इन वर्ल्ड का खिताब मिला था। दादी जानकी का अंतिम संस्कार शुक्रवार शाम 3.30 बजे माउण्ट आबू में ही ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन में होगा।

उनके निधन पर पीएम मोदी ने भी शोक जताते हुए ट्वीट कर कहा, 'ब्रह्म कुमारी प्रमुख राजयोगिनी दादी जानकी जी ने परिश्रम के साथ समाज की सेवा की। वह दूसरों के जीवन में सकारात्मक अंतर लाने में सबसे आगे रही। महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में उनके प्रयास उल्लेखनीय थे। इस दुख की घड़ी में मेरे संवेदनाएं उनके अनगिनत अनुयायियों के साथ हैं। ओम शांति।' 

ब्रह्माकुमारीज संस्थान की मुख्य प्रशासिका 

राजयोगिनी दादी जानकी का जन्म 1 जनवरी, 1916 को हैदराबाद सिंध (जो अभी पाकिस्तन में है) में हुआ था। वे 21 वर्ष की उम्र में ही इस संस्थान से जुड़ गई थी। सन् 1970 में भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राजयोग का संदेश देने के लिए पश्चिमी देशों का रुख किया था। ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि के देहावसान के पश्चात सन् 27 अगस्त, 2007 को वे संस्थान की मुख्य प्रशासिका बनी। उनके सान्निध्य में तकरीबन 46 हजार महिलाएं इस संस्थान से जुड कर काम कर रही। ब्रह्माकुमारी संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी का 27 मार्च की रात 2 बजे निधन हो गया। वे माउंट आबू अस्पताल में भर्ती थीं।

आध्यात्मिक संगठन ब्रह्माकुमारी संस्था की मुख्य प्रशासिका और स्वच्छ भारत मिशन की ब्रांड एंबेसेडर राजयोगिनी दादी जानकी 104 साल की थीं। उन्होंने माउंट आबू के ग्लोबल हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। सामने आ रही जानकारी के मुताबिक उन्होंने 27 और 27 की दरमियानी रात 2 बजे अंतिम सांस ली। राजयोगिनी दादी जानकी को मोस्ट स्टेबल माइंड इन वर्ल्ड का खिताब भी मिला था। 

दादी जानकी का जीवन

दुनियाभर में दादी के नाम से मशहूर राजयोगिनी दादी जानकी का जन्म 1 जनवरी 1916 को हैदराबाद सिंध में हुआ था जो अब पाकिस्तान में चला गया है। दादी जानकी ने 21 साल की उम्र में ही आध्यात्मिक पथ पर चलने का निर्णय ले लिया था। साल 1970 में उन्होंने भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राजयोग का संदेश देने के लिए पश्चिमी देशों का रुख किया था। उन्होंने विश्व के 140 देशों में ब्रह्माकुमारी केंद्रों की स्थापना की। इस दौरान उन्होंने लाखों लोगों के अंदर आध्यात्मिक चिंतन की इच्छा और मानव संस्कार के बीज बोए।

ब्रह्माकुमारी संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि के निधन के बाद 27 अगस्त 2007 को राजयोगिनी दादी जानकी को संस्थान की मुख्य प्रशासिका बनाया गया था। बताते हैं कि उनके सानिध्य में लगभग 46 हजार युवा बहनों ने अपना जीवन ईश्वर की सेवा में समर्पित कर दिया। वे इन सभी की अभिभावक थी।

Posted By: Preeti jha

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