जयपुर, जागरण संवाददाता। Gehlot government. शवों को सार्वजनिक स्थानों पर रखकर प्रदर्शन कर अपनी मांगे मनवाने वालों पर अब राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। सरकार पर दबाव बनाने की इस प्रक्रिया को गैर कानूनी घोषित किया जाएगा। इसके लिए कानून बनाया जा रहा है। राज्य सरकार के विधि और गृह विभाग के अधिकारियों ने इस कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी हादसे में या सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान किसी की मौत होने पर लोग एकत्रित होकर शव के साथ सार्वजनिक स्थान पर बैठ जाते हैं। ये लोग या तो नगद राशि की मांग करते हैं या फिर किसी सरकारी अधिकारी को निलंबित करने का मुद्दा उठाते हैं।

इस कारण कई बार कानून व्यवस्था की स्थिति भी खराब हो जाती है। इसी को देखते हुए अब गहलोत सरकार "राजस्थान प्रोहिबिशन फ्रॉम डेमोंसट्रेशन विद डेड बॉडी-2019 और राजस्थान प्रीवेंशन ऑफ डिस्प्रप्शन ऑफ पब्लिक मूवमेंट ओर्डिनेंश एक्ट' बना रही रही है। इस एक्ट में सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार आनंदपाल एनकाउंटर के दौरान हुए प्रदर्शनों जैसी घटनाओं को रोकना चाहती है। प्रदेश में शव को लेकर आंदोलन करने के मामले बढ़ते जा रहे है। ऐसे में सरकार इस तरह के मामलों को गैरकानूनी घोषित करेगी।

मानवाधिकार आयोग ने दिया था सुझाव

प्रदेश में शवों को लेकर मांगे मनवाने की बढ़ती परंपरा को देखते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने कानून बनाने को लेकर गहलोत सरकार को सुझाव दिया था। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने सरकार से कहा था कि शवों पर राजनीति बंद होनी चाहिए। शव के भी अपने अधिकार होते हैं, उसका सम्मान से निस्तारण एक बुनियादी अधिकार है। लेकिन राजनीतिक करने वालों के कारण शवों की दुर्गति होती है।

इस पर सरकार ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर कानून का ड्राफ्ट तैयार कराया है, जिसे शीघ्र ही मंजूर कर दिया जाएगा।सरकार कानून में प्रदेश और जिला स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी इस मामले को लेकर बनाने का कानून में प्रावधान करने जा रही है।

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