विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 01, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rajasthan: एसबीआइ के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

By Sachin Kumar MishraEdited By:
Published: Mon, 01 Nov 2021 05:19 PM (IST)Updated: Mon, 01 Nov 2021 09:27 PM (IST)

Rajasthan एसबीआइ के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी को दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार करने के बाद सोमवार को उसे ...और पढ़ें

एसबीआइ के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी गिरफ्तार। फाइल फोटो
एसबीआइ के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी गिरफ्तार। फाइल फोटो

जयपुर, जागरण संवाददाता। स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी को दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार करने के बाद सोमवार को उसे जैसलमेर लाया गया है। पुलिस ने उसे जैसलमेर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। आरोप है कि चौधरी ने जैसलमेर के होटल फोर्ट रजवाड़ा को हथियाने के लिए गलत तरीके से सौदा कर दिया। बाद में जिस कंपनी ने होटल को खरीदा था, उसी के निदेशक बन गए। पुलिस की जांच में माना गया कि चौधरी ने बिचौलियों के माध्यम से राजस्थान के जैसलमेर में स्थित होटल रजवाड़ा को हड़पने की योजना बनाई। लोन का समझौता करने के लिए बिचौलियों के मार्फत बातचीत की और संचालकों को धोखे में रखकर 200 करोड़ के होटल को सीज कर के अपने परिचित की कंपनी को नियम विरुद्ध मात्र 25 करोड़ में बिकवा दिया। बैंक से सेवानिवृत होने के बाद खुद होटल संचालक कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल हो गए। इस मामले में साल, 2015 में जैसलमेर के सदर पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ था। सीजेएम कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद चौधरी के खिलाफ वारंट जारी किया था। रविवार को जैसलमेर पुलिस ने चौधरी के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।

जानें, क्या है मामला

जैसलमेर में फोर्ट रजवाड़ा होटल के मालिक दिलीप सिंह ने साल, 2008 में गढ़ रजवाड़ा के नाम से नया होटल बनाना प्रारंभ किया। इसके लिए उन्होंने एसबीआइ की जोधपुर ब्रांच से 24 करोड़ का टर्म लोन लिया। इसी दौरान दिलीप सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बैंक ने उनके दोनों होटल फोर्ट रजवाड़ा और गढ़ रजवाड़ा का मूल्यांकन कराया। लोन का पैसा जमा कराने को लेकर स्वर्गीय दलीप सिंह के पुत्र हरेंद्र सिंह पर दबाव बनाया गया। 24 करोड़ के लोन की किस्त बकाया होने पर एसबीआइ ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया के नियमों के विरुद्ध जाकर होटल का खाता गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) कर दिया। बैंक ने दोनो होटल को सीज करने का दबाव बनाया। उसी समय अहमदाबाद की एक सीए फर्म आतिश्य कंसल्टेंसी के निदेशक देवेंद्र जैन ने हरेंद्र सिंह को लोन का समझौता कराने के लिए संपर्क किया। देवेंद्र ने हरेंद्र सिंह को अलकेमिस्ट असेट्स रिकन्सट्रक्शन कंपनी के मालिक आलोक धीर से मिलवाया, जिनका मुख्य काम लोन का समझौता कराना या रिकवरी करना था। धीर चौधरी के मित्र थे। हरेंद्र सिंह की धीर के साथ बातचीत सफल नहीं हो सकी।

इसी बीच, बैंक ने 14 अक्टूबर, 2013 को हरेंद्र सिंह को करीब 40 करोड़ की देनदारी बताते हुए नोटिस जारी किया। इसमें मूल रकम के साथ ब्याज भी शामिल था। इस पर हरेंद्र सिंह ने लोन वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (डीआरटी) में अपील की। उसी दौरान एसबीआइ ने पैसा रिकवरी के लिए दोनों होटल का एसेट धीर को दे दिया। बैंक इन पर कब्जा कर चुका था। नीलामी किए बिना ही धीर को दोनों होटल सौंप दिए। उन्होंने दोनों होटलों पर कब्जा कर लिया। इसके एक माह बाद ही चौधरी सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्ति के कुछ दिन बाद वह धीर की कंपनी के निदेशक बन गए। हरेंद्र सिंह को चौधरी के इरादे की जानकारी हो गई। इस पर उन्होंने जैसलमेर के सदर पुलिस थाने में साल, 2015 में चौधरी सहित आठ लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कराया। मामला कोर्ट में पहुंच गया।

कोर्ट ने जारी किया था गिरफ्तारी वारंट

जैसलमेर सीजेएम कोर्ट ने माना कि बिना नीलामी के होटल बेचना धोखाधड़ी है। कोर्ट ने 23 अक्टूबर को गिरफ्तारी वारंट जारी किए। जैसलमेर पुलिस ने रविवार को चौधरी को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। धीर फिलहाल फरार है।