अजमेर, जेएनएन। राजस्थान नर्सेज संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार मीणा के आह्वान पर 27 मार्च को कुछ समय के लिए अजमेर संविदा चिकित्सा कर्मियों ने कार्य का बहिष्कार किया। मीणा ने आरोप लगाया है कि मौजूदा संकट के समय राजस्थान की सरकार संविदा चिकित्सा कर्मियों के साथ भेदभाव कर रही है। कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनजर प्रदेश के 25 हजार संविदा चिकित्सा कर्मी भी स्थाई चिकित्सा कर्मियों के तरह रात और दिन सेवा का काम कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी सरकार स्थाई और संविदा चिकित्सा कर्मियों के साथ भेदभाव कर रही है। मीणा ने 27 मार्च को अजमेर में चिकित्सा कर्मियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि सरकार जो सुविधा स्थाई कर्मचारियों को दे रही है वो ही सुविधा संविदा कर्मियों को भी मिलनी चाहिए।

सरकार ने 26 मार्च को ही चिकित्सा कर्मियों की सूची मांगी है, लेकिन साथ ही निर्देश दिए हैं कि संविदा चिकित्सा कर्मियों के नाम न भेजे जाए। सरकार की यह नीति पूरी तरह भेदभाव पूर्ण है। कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनजर जो जोखिम स्थाई कर्मचारियों को है उसी जोखिम को संविदा कर्मचारी भी उठा रहे हैं। स्थाई कर्मचारी के मुकाबले संविदा कर्मचारियों को वेतन भी कम मिलता है। मीणा ने अजमेर के जेएलएन अस्पताल के अधीक्षक को मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में कहा कि 12 हजार चिकित्सा कर्मियों की जो भर्ती लम्बित है उसे संविदा कर्मचारियों से पूरा किया जाए, ताकि संविदा कर्मियों को भी स्थाई कर्मियों की तरह लाभ और वेतन मिल सके। मीणा ने कहा कि सरकार की इस भेदभाव पूर्ण नीति से चिकित्सा कर्मियों में गुस्सा है। जब पूरा देश नाजुक दौर से गुजर रहा है तब किसी भी चिकित्सा कर्मी के साथ सरकार को भेदभाव नहीं करना चाहिए।

Posted By: Vijay Kumar

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