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आपसी खींचतान के चलते 6 महीने से नहीं हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक, पायलट खेमे ने अशोक गहलोत पर बढ़ाया दबाव

पिछले साल 25 सितंबर को कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं अजय माकन पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में पहुंचे थे।

By Jagran NewsEdited By: Piyush KumarPublished: Wed, 22 Mar 2023 08:02 PM (IST)Updated: Wed, 22 Mar 2023 08:02 PM (IST)
। पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की फाइल फोटो।

नरेन्द्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में विवाद बढ़ता जा रहा है। विवाद के चलते प्रदेश के इतिहास में पहली बार विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल की बैठक नहीं बुलाई गई। मंत्रियों और अधिकारियों से सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के विधायकों की नाराजगी के कारण ही विधानसभा सत्र प्रारंभ होने से पहले पहले भी बैठक नहीं हुई।

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सचिन पायलट खेमे ने अशोक गहलोत पर बढ़ाया दबाव 

छह महीने से विधायक दल की बैठक नहीं हुई है। पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके खेमे के विधायकों ने विधायक दल की बैठक बुलाने को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर दबाव बढ़ा दिया है। इनका कहना है कि विधायक दल की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री के बारे में फैसला होना चाहिए। पायलट खेमे के विधायक मुकेश भाकर,वेद प्रकाश सोलंकी और राकेश पारीक का कहना है कि बैठक बुलाकर विधायकों पर निर्णय छोड़ना चाहिए।

पारीक ने कहा कि पार्टी के विधायकों को विश्वास में लिए बिना सरकार में फैसले हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पायलट खेमे के विधायकों ने 24 मार्च को प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के जयपुर पहुंचने पर उनसे मुलाकात कर विधायक दल की बैठक बुलाने की मांग करने की तैयारी की हैं। सोलंकी ने कहा,विधायक दल की बैठक बुलाकर सीएम सहित सभी निर्णय पार्टी आलाकमान पर छोड़ने का निर्णय होना चाहिए।

विवाद बढ़ने की उम्मीद

प्रदेश कांग्रेस में चल रहा विवाद बढ़ने की उम्मीद है। मंगलवार को रंधावा ने गहलोत और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ बैठक कर जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों के नामों की सूची तय की है। सूत्रों के अनुसार इस सूची में पायलट समर्थकों को कम महत्व दिया गया है। ऐसे में सूची घोषित होने के बाद विवाद बढ़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल 25 सितंबर को कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं अजय माकन पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में पहुंचे थे। बैठक में सीएम सहित सभी निर्णय सोनिया पर छोड़े जाने को लेकर एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित होना था।

सीएम बदले जाने की आशंका के चलते गहलोत खेमे के विधायक बैठक में नहीं पहुंचे । सीएम के विश्वस्त संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल,जलदाय मंत्री महेश जोशी व पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ 80 विधायकों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सी.पी.जोशी के आवास पर पहुंचे और सभी इस्तीफे दिलवा दिए। हालांकि बाद में विधायकों ने इस्तीफे वापस ले लिए। पायलट खेमा धारीवाल,जोशी व राठौड़ के खिलाफ कार्रवाई चाहता है।

भाजपा बोली,सीएम को भय है

भाजपा विधायक दल के उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने बुधवार को कहा कि सीएम को भय है,इस कारण विधायक दल की बैठक नहीं बुला रहे हैं। सीएम अपने ही विधायकों को खुश नहीं रख पा रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान विधायक दल की बैठक होने की परंपरा है। भाजपा विधायक दल की बैठक हमेशा प्रत्येक मंगलवार को हुई है।


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