जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रहे पॉवर गेम के बीच एक और उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कसरत तेज हो गई है। गहलोत खुद एक और उपमुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। भाजपा में पहली बार सतीश पूनिया के रूप में जाट को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कांग्रेस में जाट समाज में दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के जाट नेताओं ने दिल्ली तक अपनी बात पहुंचाई है। गहलोत इसी का लाभ उठाते हुए राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और कृषि मंत्री लालचंद कटारिया में से किसी एक को उपमुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।

कटारिया मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे हैं। वहीं, चौधरी वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं। दोनों ही गहलोत के निकट माने जाते हैं। चौधरी और कटारिया ने पिछले दिनों दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर जाट समाज को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग रखी है। उधर, दूसरी तरफ गहलोत विरोधी खेमा पूरी तरह से आश्वस्त है कि पंचायत चुनाव तक सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दोनों पदों पर रहेंगे।

जाट वोट बैंक को साधने की रणनीति

एक और उपमुख्यमंत्री बनाकर एक तरफ जहां गहलोत पायलट को बैलेंस करना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ जाट समाज को खुश करने की भी रणनीति पर काम कर रहे हैं। दो दिन दिल्ली में रहकर जयपुर लौटे गहलोत ने अपने समर्थकों को इस बात के संकेत दिए हैं कि कांग्रेस आलाकमान शीघ्र ही इस बारे में निर्णय करेगा। गहलोत दीपावली से पहले एक उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव में इसका पार्टी को काफी लाभ मिलेगा। वर्तमान में जाट समाज भाजपा की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है, इसे रोकने के लिए उप मुख्यमंत्री बनाया जाना आवश्यक है। दो दिन दिल्ली में रहकर गहलोत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, आनंद शर्मा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे से मुलाकात की।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से भी गहलोत की टेलीफोन पर बात हुई बताई। गहलोत ने इन नेताओं को प्रदेश के जातिगत व राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए जाट नेता को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर अपने तर्कों से समझाने का प्रयास किया। प्रदेश की राजनीति में जाट मतदाता हमेशा से ही निर्णायक भूमिका में रहे हैं। शेखावाटी के साथ ही जोधपुर और बीकानेर संभाग के चुनाव परिणाम काफी हद तक जाट मतदाताओं पर निर्भर करते हैं। भाजपा में जाट को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल के एनडीए में शामिल होने से कांग्रेस पर जाट नेता को सत्ता व संगठन में वजन देने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

बेनीवाल की जाट समाज के युवाओं में अच्छी पकड़ है। राजस्थान का काम संभाल रहे कांग्रेस के एक राष्ट्रीय सचिव ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सीएम ने काफी हद तक अपनी बात आलाकमान तक पहुंचाई है, शीघ्र ही इस बारे में निर्णय होगा। उधर, राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे ने पंचायत चुनाव तक संगठन में किसी प्रकार के बदलाव से इनकार किया, लेकिन कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल करना सीएम का विशेषाधिकार है। सीएम कांग्रेस अध्यक्ष से चर्चा कर निर्णय करते हैं। 

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Posted By: Sachin Mishra

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