उदयपुर, संवाद सूत्र। चित्तौड़गढ़ की जिला एवं सेशन न्यायालय ने सास की हत्या के आठ साल पुराने चर्चित मामले में बहू को दोषी ठहराते हुए बुधवार को सजा सुनाई। जिसमें न्यायालय ने दोषी बहू को आजीवन कारावास के साथ बीस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन सूत्रों के अनुसार घटना 5 फरवरी 2013 की है। उस दिन चित्तौड़गढ़ शहर कोतवाली में गांधीनगर निवासी कांतिलाल पुत्र मनोहर लाल जैन ने अपनी पत्नी सारिका उर्फ पिंकी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। इसमें बताया कि वह अपनी परिवार के साथ पहले गांधीनगर स्थित पैतृक मकान में रहते थे। बाद में उनकी पत्नी और मां विमला देवी के बीच लगातार झगड़े होने लगे तो मां पास ही कुमावतों के नोहरे स्थित किराए के मकान में रहने लगी।

शादी समारोह में शामिल होने गए थे मंदसौर

चार फरवरी 2013 को वह अपनी मां और पत्नी के साथ मंदसौर में रिश्तेदार के यहां शादी—समारोह में शामिल होने गए थे। जहां से लौटने के बाद उन्होंने पत्नी को गांधीनगर स्थित मकान में छोड़ा तथा मां को किराए वाले मकान में छोड़ने जाने लगे। शाम को उन्हें एक अन्य शादी समारोह में जाना था तो पत्नी सारिका ने सास विमला देवी को भी पैतृक मकान पर छोड़ने को कहा था। बाद में वह अपने काम से निकल गए।

मां बैठक में लेटी व कान से रक्त बह रहा था

इसी बीच शाम लगभग साढ़े चार बजे पत्नी सारिका का फोन आया और उसने बताया कि मां की तबियत खराब हो गई है और वह बोल नहीं पा रही है। पत्नी के कहने पर वह तत्काल निजी अस्पताल के चिकित्सक को लेकर घर पहुंचे। जहां देखा कि उनकी मां बैठक में लेटी अवस्था में थी और उसके कान से रक्त बह रहा था। चिकित्सक ने मां को मृत बताया।

अपनी सास की हत्या करना कबूल कर लिया

जिस पर कांतिलाल जैन ने कोतवाली के तत्कालीन थनाधिकारी बोराज सिंह भाटी को सूचित किया। पुलिस विमला देवी का शव अस्पताल लेकर पहुंची और पोस्टमार्टम कराया। जिसमें पता चला कि उनकी मौत गला दबाने से हुई है। पति की शिकायत पर पुलिस ने उनकी पत्नी सारिका उर्फ पिंकी जैन को गिरफ्तार कर लिया। जिसने पुलिस पूछताछ में अपनी सास की हत्या करना कबूल कर लिया।

बीस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई

पुलिस ने प्रकरण का अनुसंधान पूरा करने के बाद 23 मार्च 2013 को न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायाधीश दिनेश कुमार नागौरी ने हत्या के लिए विमला देवी की बहू सारिका उर्फ पिंकी को दोषी माना तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्र कैद की सजा के साथ बीस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

Edited By: Vijay Kumar