जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में छह विधायकों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का सलाहकार बनाए जाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है। राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, गहलोत ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं किसी को भी सलाहकार बना सकता हूं। इसके लिए उन्हें कोई पूछ नहीं सकता है। हमने किसी को कोई दर्जा देने का आदेश नहीं निकाला है। मैं सलाह ही तो ले रहा हूं और क्या कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि संसदीय सचिव भी पहले से बनते आए हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा नहीं दिया जाता है। हम सरकार चला रहे हैं। हमें जानकारी है कि विधायकों के लाभ के पद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है और अन्य राज्यों में क्या फैसले हुए हैं। मैं किसी भी सांसद, विधायक और साहित्यकार को सलाहकार बना सकता हूं। गहलोत ने कहा कि यह समझ से परे है कि इसे मुद्दा बनाया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि लाभ के पद में कौन आता है यह हमें पता है। हमने सलाहकारों को कोई दर्जा नहीं दिया है।

कोर्ट में जाएंगेः राजेंद्र राठौड़ 

उधर, भाजपा विधायक दल के उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर कोर्ट में जाएंगे। सीएम के बयान से साफ हो गया कि उन्होंने विधायकों के असंतोष को थामने के लिए सलाहकार बनाया है। अब संसदीय सचिव बनाने वाले हैं। अंतर्कलह से जूझ रही सरकार को बचाने के लिए वह ऐसा कर रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि सरकार आफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 की धारा 5(1)(सी) में दिए गए प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन कर रही है। इन प्रावधानों के अनुसार किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को कोई अधिकार नहीं है कि वह राज्य से संबंधित गोपनीय सूचनाओं को बिना किसी अधिकारिता के अपने पास रखे। उन्होंने कहा कि सीएम द्वारा रविवार को दिए गए बयान से साफ हो गया कि सलाहकारों को सरकार द्वारा कोई पत्रावली नहीं भेजी जा सकेगी। विधायकों को खुश करने के लिए सलाहकार बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि सीएम ने पिछले दिनों कांग्रेस विधायक राजकुमार शर्मा, डा. जितेंद्र सिंह, दानिश अबरार, निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा, बाबूलाल नागर और संयम लोढ़ा को अपना सलाहकार बनाया था। इस पर राठौड़ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर नियुक्ति को नियमों के खिलाफ बताया था। उनके पत्र पर राज्यपाल ने सरकार से जवाब मांगा है।

Edited By: Sachin Kumar Mishra