जयपुर, मनीष गोधा। राजस्थान में अब ऑनर किलिंग पर मौत या पूरे जीवन का कारावास और उन्मादी भीड की हिंसा में किसी व्यक्ति की मौत पर आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हो सकती हैं। राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को इन दोनों मामलों से जुडे दो विधेयक रखे गए। इन पर आने वाले दिनों में चर्चा कर इन्हे पारित किया जाएगा। राजस्थान सरकार के मंत्रिमण्डल ने सोमवार को ही इन विधेयकों को मंजूरी दी थी। ऑनर किलिंग पर विधेयक लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य होगा।

राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को ऑनर किलिंग के खिलाफ राजस्थान सम्मान और परम्परा के नाम पर वैवाहिक सम्बन्धो की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक और उन्मादी भीड की हिंसा के खिलाफ राजस्थान लिचिंग से संरक्षण विधेयक रखे गए। राजस्थान सरकार ने दोनों अपराधों को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध माना है। सरकार ने यह कानून अन्य सभी कानूनों के अतिरिक्त बनाए है।

विधि विशेषज्ञ अभिनव शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार ने दो नए अपराध घोषित किए है। यदि कोई व्यक्ति इन अपराधों का दोषी माना जाता है तो उसे वहीं सजा मिलेगी जो इन कानूनों में दी गई है। जैसे उन्मादी भीड की हिंसा में यदि किसी की मौत हो जाती है और इस कानून के तहत केस दर्ज होता हैं आरोपी को अधिकतम कठोर आजीवन कारावास की सजा ही मिलेगी, क्योंकि इस कानून के तहत यही अधिकतम सजा दी गई है।

यह हैं प्रमुख प्रावधान

ऑनर किलिंग-

- इस विषय पर किसी भी तरह से लोगों के जुुटने यानी किसी तरह की खाप पंचायत करने को भी गैर कानूनी माना गया है और इसमें शामिल होने वालों पर छह माह से पांच साल तक का कारावास और एक लाख तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है।

- शादी करने वाले जोडों को परेशान करना भी अपराध माना गया है और इसके लिए दो से पांच साल तक की सजा और एक लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

- यदि ऐसे मामले में शादी करने वाले जोडे या इनमें से किसी एक की हत्या की जाती है तो सम्बन्धित आरोपी को मौत या जीवन की अंतिम संास तक कारावास और पांच लाख रूप्ए तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।

- ऐसे मामलो में यदि शादी करने वाले जोडे को गम्भीर घायल किया जाता है तो आरोपी को कम से कम दस साल की सजा और तीन लाख तक का जुर्माना हो सकता है

- ऐसे मामलों में यदि शादी करने वाले जोडे को सामान्य चोट पहुंचाई जाती है तो आरोपी को तीन से पांच साल तक की सजा और दो लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

उन्मादी भीड की हिंसा

- उन्मादी भीड की हिंसा से पीडित के घायल होने पर सात साल का कारावास और एक लाख तक का जुर्माना,

- पीडित के गम्भीर घायल होने पर आरोपी को दस साल तक की सजा और 25 हजार से तीन लाख तक का जुर्माना

- पीडित की मौत पर होने पर आजीवन कठोर कारावास और एक से पांच लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

- विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि उन्मादी भीड की हिंसा को जन्म देने वाली किसी भी तरह आपत्तिजनक सामग्री किसी भी रूप में प्रचारित प्रसारित की जाती है तो उस व्यक्ति को तीन वर्ष तक का कारावास और 50 हजार तका जुर्माना हो सकता है।

- विधेयक में पीडितों के विस्थापन, मुआवजे और राहत शिविरों का भी प्रावधान किया गया है और सम्बन्धित पुलिस थाने के अधिकारी पर यह जिम्मेदारी डाली गई है कि उस क्षेत्र में ऐसी स्थिति पैदा न होने दे।  

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Posted By: Preeti jha

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