जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान के अलवर में आयाजित विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और विभिन्न हिन्दूवादी संगठनों की धर्मसभा कथित गौतस्कर अकबर खान की मौत के मामले में आरोपितों की तुलना आजादी की लड़ाई लड़ने वाले देशभक्तों से की है ।

वहीं भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने एक बार फिर,अकबर की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि बेवजह से तीन लोों को फंसाया गया है। अलवर पुलिस द्वारा आरोपित कथित गौरक्षकों के खिलाफ चार्जशीट दायर किये जाने के विरोध में विहिप ने धर्म सभा बुलाई थी, जिसमें तीनों आरोपितों को चन्द्रशेखर आजाद,भगत सिंह और राजगुरु बताया गया। धर्मसभा में वक्ताओं ने कहा आजाद,भगत सिंह और राजगुरू ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी और तीन गौरक्षकों ने धर्म एवं मानवता की रक्षा की लड़ाई लड़ी है।

इस धर्मसभा में आरोपितों में से एक नवल किशोर भी मौजूद था और उसने ही आरोपितों की तुलना आजादी की लड़ाई लड़ने वाले देशभक्तों से की । इस धर्मसभा में आरोपितों किसी भी कीमत पर छुड़ाने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर संत गिरी महाराज ने कहा कि जहां से भी गाय की खाल बरामद होगी वहां अब से समाधि बनाकर मेला लगवाया जाएगा ।

धर्मसभा में अलवर जिले के विहिप और अन्य हिन्दूवादी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए । मंच से भाषण देने वाले नवल किशोर का कहना है कि पुलिस बेवजह हम लोगों को फंसा रही है । उल्लेखनीय है कि अकबर खान की कथित तौर पर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गई हत्या के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपितों के खिलाफ शुक्रवार को चार्जशीट दाखिल की है।

रामगढ़ पुलिस थाना अधिकारी थानाधिकारी चौथमल जाखड़ ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 302,342 और 323 के तहत यह चार्जशीट रामगढ़ सिविल कोर्ट में दाखिल की गई है । तीन आरोपितों में धर्मेंद्र यादव, परमजीत सिंह व नरेश कुमार है शामिल है । वहीं विहिप कार्यकर्ता नवल किशोर के खिलाफ जांच लंबित रखी गई है ।

यह है मामला

अलवर जिले में गाय तस्करी के संदेह में कुछ लोगों ने 20 जुलाई की रात को हरियाणा के नूंह निवासी अकबर खान की बुरी तरह पिटाई की। सूचना पर पहुंची पुलिस अकबर को अपने साथ थाने में लेकर आ गई और सुबह करीब 4 बजे अस्पताल लेकर गई तो उसकी मौत हो चुकी थी।

राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। राज्य के गृह मंत्री ने कहा था कि साक्ष्यों से तो यह हिरासत में मौत का मामला दिखता है। इस मामले में एक पुलिस को निलंबित करने के साथ ही तीन को लाइन हाजिर किया गया था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए रिपोर्ट मांगी थी। संसद में भी यह मामला उठा था।  

Posted By: Preeti jha