जयपुर, जागरण संवाददाता। Gehlot Government: राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने पिछली वसुंधरा राजे सरकार के निर्णय बदलने की कड़ी में तीन और फैसले बदलते हुए तय किया है कि खानों की नीलामी अब सीधे होगी। राजस्थान में अब खान आवंटन में खातेदार को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। पिछली सरकार का फैसला बदलने के पक्ष में गहलोत सरकार ने तर्क दिया है कि खातेदार नीलामी में जमीन लेकर इसे सबलेट कर रहे हैं। इससे ना तो खातेदारों को लाभ मिल पा रहा है और ना ही सरकार को राजस्व मिल रहा है।

दरअसल, वसुंधरा राजे सरकार ने तय किया था कि खानों की नीलामी में खातेदारों को प्राथमिकता मिलेगी। इसको लेकर वसुंधरा सरकार का तर्क था कि जिन खातेदारों की जमीन में माइंस थी, वे एनओसी नहीं दे रहे थे। इस कारण नीलामी प्रक्रिया सफल नहीं हो पा रही थी। ऐसे में खातेदारों को नीलामी में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया था। वसुंधरा सरकार के अंतिम छह महीने के निर्णयों की समीक्षा करने के लिए गठित मंत्रियों की समिति की सिफारिश पर गहलोत सरकार ने अब तय किया है कि खनन पट्टों का आवंटन सीधे ही नीलामी से होगा।

अब  नीलामी में खातेदारों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। सरकार ने एक निर्णय यह लिया कि पिछली वसुंधरा राजे सरकार में 33 केवी के संयंत्र और मीटर बदलने सहित कई टेंडर्स को मंजूरी दी गई है, जिनकी समीक्षा की जाएगी।

इस मौके पर मंत्रियों की कमेटी के अध्यक्ष स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने स्पष्ट कर दिया कि पिछली सरकार के लिए गए ऐसे निर्णय जो जनहित में नहीं हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। शांति धारीवाल ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक बदले की भावना से सरकार काम नहीं कर रही है। पिछली सरकार के वह निर्णय जो जनहित में नहीं हैं और जिन में गड़बड़ी और खामियों की आशंका हैं, उन्हें ही निरस्त किया जाएगा। 

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Posted By: Sachin Mishra

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