जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान के 23 शहर और कस्बे राज्य सरकार की देशभर में जमकर किरकिरी करा रहे है। सरकार के काफी प्रयासों के बावजूद इन शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही के चलते ये शहर स्वच्छ भारत मिशन में लगातार फिसड्डी बने हुए है।

चाहे घरों में शौचालय निर्माण हो या वार्डों से कचरा संग्रहण का काम हो अथवा स्वच्छ भारत मिशन की राशि खर्च करने का मामला हर मामले में इन शहरों की नाकामी सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन लांच किया था। इस मिशन में देश के सभी 4 हजार 41 शहर शामिल किए गए। इस मिशन का मकसद शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए खुले में शौच से मुक्ति, घरों से कचरा संग्रहण और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना है। इस मिशन के तहत केन्द्र की ओर से राज्यों को अनुदान भी दिया गया है।

प्रदेश में राज्य सरकार मिशन की क्रियान्विति को लेकर काफी गंभीर है। मिशन के बारे में जागरूकर करने के लिए निकायों के जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने कई बार आमुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित किए।

यही नहीं कई बार मार्गदर्शन, स्पष्टीकरण और परिपत्र भी जारी किए गए। इन सबके बावजूद प्रदेश के कुल 192 शहरों में से 23 शहर ऐसे है, जो स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य समय पर पूरा नहीं कर पा रहे है। शौचालयों का समय पर निर्माण नहीं होने के चलते इन 23 शहरों और कस्बों में कोटा, भीलवाड़ा, पाली, सुजानगढ़, जहाजपुर एवं रूपबास शहर ऐसे है, जो अब तक खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं।

ये शहर एक बार खुले में शौच मुक्त घोषित हो गए थे, लेकिन केन्द्र सरकार की क्वालिटी कौंसिल ऑफ इण्डिया की दोबारा की गई जांच में इन्हें खुले में शौच से मुक्त नहीं माना गया। घरेलू शौचालय निर्माण ही नहीं स्वच्छ भारत मिशन के अन्य घटकों में ये शहरी निकाय उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म नहीं कर रहे हैं।

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वच्छ भारत मिशन के लिए जो राशि इन निकायों को आवंटित की गई, उसे भी ये निकाय पूरी तरह खर्च नहीं कर पाए है।

इन शहरों और कस्बो में स्वीकृत आवेदनों के मुकाबले अब तक शौचालयों का निर्माण

कोटा में 13090 आवेदन स्वीकृत हुए इनमें से 6091, भीलवाड़ा में 5389 आवेदन स्वीकृत हुए इनमें से 1955, सुजानगढ़ में 1003 में से 485 ,जैसलमेर में 721 में से 483, बांरा में 5547 में से 2913, पाली में 7900 में से 2539 ,आबू रोड में 1595 में से 1000, बांसवाड़ा में 2189 में से 1613, खंडेला में से 936 में से 332 ,कैथून में 1924 में से 796, आसींद में 885 मे से 472, बिलाड़ा में 1990 में से 1127 पिंडवाड़ा में 623 में से 259, भुसावर में 844 में से 356, जैतारण में 1950 में से 1443 ,तखतगढ़ में 514 में से 345, देवगढ़ में 1027 में से 690, डेगाना में 935 में से 610 ,जहाजपुर में 728 मे से 491, भवानीमंडी में 1408 में से 1005, सरवाड़ में 1369 में से 1007 ,फालना में 959 में से 987 और रूपबास में 1145 में से 630 शौचालयों का निर्माण हो पाया है।  

Posted By: Preeti jha

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