जयपुर, जागरण संवाददाता। Gehlot Government. राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए योजना बना रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार अब प्रदेश के 16 हजार 517 ट्रांसजेंडरों के लिए अलग से पहचान-पत्र बनाएगी। अलग पहचान-पत्र के माध्यम से इनको सरकारी नौकरी सहित अन्य सरकारी योजनाओं का प्राथमिकता से लाभ दिया जाएगा।

प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भंवरलाल मेघवाल ने कहा कि कार्मिक विभाग के साथ मिलकर नियम बनाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी नौकरी में भी इस समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो सके ।

भिखारियों को दिया जाएगा रोजगार

मेघवाल ने कहा कि जयपुर में भिखारियों के लिए फ्रेंडली डिटेंशन सेंटर बनाया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के अन्य शहरों में इसी तरह के सेंटर बनेंगे। स्थानीय भिखारियों को पकड़कर रोजगार दिया जाएगा। बाहरी लोगों को अपने घर भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि जयपुर में एक फेंडली डिटेंशन सेंटर बनाया जाएगा। एनजीओ के सहयोग से चलाए जाने वाले इस डिटेंशन सेंटर में भोजन की व्यवस्था से लेकर कौशल विकास की सुविधाएं होंगी। सेंटर संचालित करने के लिए एनजीओ को सरकार प्रति भिखारी अनुदान देगी।

गौरतलब है कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है। गहलोत सरकार ने पिछले दिनों ही विधानसभा में सीएए के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनआरपी) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। भाजपा ने इसका विरोध किया था। विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने के बाद अब गहलोत सरकार के संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री शांति धारीवाल लॉ विभाग के अधिकारियों,राज्य के महाधिवक्ता एवं वरिष्ठ वकीलों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। वे अगले एक-दो दिनों में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों से भी इस बारे में चर्चा करेंगे। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गहलोत सरकार सुप्रीम कोर्ट में यह आग्रह करेगी कि देश के अन्य भागों की तरह राजस्थान में भी सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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