जयपुर, जेएनएन। राजस्थान हाइकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास सहित अन्य सुविधाएं देने के मामले में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव और राजस्थान सरकार को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार और न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह नोटिस जारी किए है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कुछ समय पहले अपने आदेश के जरिए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास और कैबिनेट मंत्रियों के समान सुविधाएं देने वाले कानून को रद कर दिया था। यह आदेश लागू नहीं किए जाने पर मूल याचिकाकर्ता मिलाप चंद डंडिया ने अवमानना याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विमल चैधरी और अधिवक्ता योगेश टेलर ने अदालत को बताया कि हाइकोर्ट ने गत चार सितंबर को आदेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगला और अन्य सुविधाएं देने को गलत माना था। इसके साथ ही अदालत ने इस संबंध में राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम, 2017 की धारा 7 बीबी और धारा 11(2) को रद्द कर दिया था।

अदालत ने अपने आदेश में माना था कि लोकतंत्र में पूर्व मुख्यमंत्री और आमजन समान है। ऐसे में उन्हें आजीवन कोई सुविधाएं नहीं दी जा सकती। याचिका में कहा गया कि अदालती आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधाएं वापस नहीं ली है और ना ही उनके आवास खाली कराए गए हैं। खंडपीठ के इस आदेश की राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील भी पेश नहीं की है। ऐसे में हाइकोर्ट का चार सितंबर का आदेश अंतिम आदेश हो गया है। इसलिए अदालती आदेश पालना कराई जाए और अवमाननाकर्ता अफसरों पर कार्रवाई की जाए। इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

गौरतलब है कि सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास, एक निजी सचिव, एक निजी सहायक, लिपिक दो सूचना सहायक, चालक और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सुविधा का प्रावधान कर दिया था। इसे उच्च न्यायालय ने गलत मानते हुए रद कर दिया था।  

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Posted By: Sachin Mishra

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