जासं, खडूर साहिब : गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ साहिब (ग्वालियर) में शनिवार को 400 वर्षीय बंदी छोड़ शताब्दी के संबंध में तीन दिवसीय गुरमति समागम का आगाज हुआ। यहां के गुरुद्वारा बीड़ बाबा बुड्ढा साहिब से एतिहासिक शब्द चौकी यात्रा श्री अकाल तख्त साहिब पहुंची थी और फिर वहां से पैदल यात्रा आरंभ हुई थी। यह 850 किलोमीटर का सफर तय करके करीब 30 दिन बाद 14 अक्टूबर को गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ साहिब पहुंची। बादशाह जहांगीर की ओर से ग्वालियर के किले में कैद किए गए 52 राजाओं को श्री गुरु हरगोबिद साहिब ने रिहा करवाया था। इसी उपलक्ष्य में यह आयोजन किया जाता है।

400 वर्षीय बंदी छोड़ शताब्दी समागमों के संबंध में कार सेवा खडूर साहिब संप्रदाय व मध्य प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थियों ने धार्मिक प्रश्नोत्तरी मुकाबलों में भाग लिया। इस दौरान छह हजार सहिज पाठ के भोग डाले गए। कवि दरबार में जिले के भाई जरनैल सिंह और करनैल सिंह के जत्थे ने संगत को गुरबाणी से निहाल किया। गुरमति समागम के दौरान निर्मल सिंह नूर, सुखप्रीत सिंह के जत्थे ने श्री गुरु हरगोबिद साहिब के जीवन पर रोशनी डाली। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने भी समागम में हाजिरी भरी। भाई सुखरीज सिंह कन्हैया ने बंदी छोड़ दिवस के इतिहास से अवगत करवाया। समागम में पंजाब एंड सिध बैंक के पंजाब के डायरेक्टर डा. इंद्रजीत सिंह, आइएस बलदेव सिंह के परिवारों को सम्मानित किया गया। निहंग जत्थेबंदियों ने महल्ला निकाला

इस मौके पर निहंग जत्थेबंदियों ने उत्साह के साथ महल्ला निकाला। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, ज्ञानी गुरमिदर सिंह, ज्ञानी रणजीत सिंह, कुलवंत सिंह ने संगत को बधाई दी। बाबा बिधी चंद संप्रदाय के मुखी अवतार सिंह, निरमले संप्रदाय से तेजा सिंह, सेवा पंथी संप्रदाय से महंत कर्मजीत सिंह ने भी संगत को संबोधित किया। वहीं संगत के लिए लंगर और मेडिकल कैंप भी लगाया गया है। कार सेवा खडूर साहिब के मुखी बाबा सेवा सिंह, एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह, सुखदेव सिंह भूरा कोहना भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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