तरनतारन [धर्मवीर सिंह मल्हार]। कस्बा श्री गोइंदवाल साहिब के समीप गांव धूंदा निवासी सैनिक अमरजीत सिंह जब कारगिल की लड़ाई में दुश्मनों की फौज को लोहे के चने चबवाते हुए शहीद हुए तो पत्नी रंजीत कौर गहरे सदमे में थी। दो मासूम लड़कों और एक लड़की की मां रंजीत कौर को उस समय कुछ सूझ नहीं रहा था जब उसके शहीद पति का पार्थिव शरीर गांव लाया गया। 

सुहागन से विधवा होने का संताप लेकर कई वर्ष जिंदगी जीते हुए रंजीत कौर ने अपना जिगरा बड़ा करते हुए पति की शहादत को सलाम किया। रंजीत कौर ने अपने बड़े लड़के गुरप्रीत सिंह गोपी को देशभक्तों की कहानियों से लेकर कारगिल की चोटियों पर कारगिल का जाम पीने वाले पति की बहादुरी के किस्से सुनाए। फिर क्या था गुरप्रीत सिंह गोपी ने अपनी विधवा मां रंजीत कौर के आंसुओं को पोंछते हुए सेना की वर्दी पहनी।

कारगिल शहीद अमरजीत सिंह की फाइल फोटो। 

रंजीत कौर ने दैनिक जागरण को बताया कि कारगिल की लड़ाई में जब पति अमरजीत सिंह की शहादत हुई तो बड़े बेटे गुरप्रीत सिंह की आयु महज चार वर्ष थी। उस समय गोपी जब पिता को मिलने की जिद करता तो मां ने उसे खिलौने के तौर पर बंदूक खरीद कर दी। इस बंदूक (खिलौना) को चलाते हुए गोपी बड़ा होने लगा।

रंजीत कौर अपनी बहू, बेटी व छोटे लड़के साथ जानकारी देते हुए।   

रंजीत कौर कहती हैंं कि बचपन में खिलौने वाली बंदूक से खेलने वाला मेरा गुरप्रीत आज देश की रक्षा कर रहा है। मुझे अपने शहीद पति पर तो नाज रहेगा ही, साथ ही बेटे पर भी गर्व है। उसने दूध का कर्ज चुकाते हुए फौज ज्वाइन की है। सैनिक गुरप्रीत सिंह का दो वर्ष पहले सलिंदर कौर हनी के साथ विवाह हुआ है। गुरप्रीत सिंह इस समय लखनऊ ( यूपी) में तैनात है। उसका छोटा भाई हरप्रीत सिंह भी चाहता है कि मैं भी सैनिक बनकर देश की सेवा करूं। बहन संदीप कौर रक्षाबंधन के लिए दर्जनों राखियां इस लिए तैयार कर रही है कि गुरप्रीत सिंह के साथ ड्यूटी पर तैनात बाकी फौजी भी राखी बांध सके।

शहीद बलविंदर का बेटा भी सेना में

कारगिल शहीद लांसनायक बलविंदर सिंह का बेटा सिमरजीत सिंह 19 सिख रेंजमेंट में यूपी के फतेहगढ़ सेंटर में तैनात है। कारगिल की लड़ाई 20 वर्ष पहले हुई थी। उस समय सिमरजीत सिंह अपनी मां बलजीत कौर की गोद में खेलता था। कारगिल की चोटियों पर बलविंदर सिंह की शहादत का जब पता चला तो बलजीत कौर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

शहीद पति बलविंदर सिंह की तस्वीर को दिखाते बलजीत कौर अपने लड़के सिमरजीत सिंह, बहूू कोमल कौर व बेटी के साथ। 

तरनतारन जिले के गांव मल्लमोहरी निवासी बलजीत कौर को एक तरफ छोटे बच्चों की परवरिश की चिंता व दूसरी तरफ पति का साया उठ जाने का दर्द था। बलजीत कौर बताती हैंं कि मैं अपना जेरा वड्डा करी रखिया। दो धीया अते बेटे दी परवरिश विच्च कोई कसर नहीं ओन दित्ती। मेरा पुत 19 सिख रेंजमेंट में बतौर सैनिक देश की सेवा कर रहा है।

बलजीत कौर कहती हैंं कि मेरा पुत मेरे ते हत्थी छांवां करदा ए। एक माह की छुट्टी पर आए सिमरजीत सिंह ने दैनिक जागरण को बताया कि देश की सेवा करने का मौका तकदीर वालों को मिलता है। मुझे देश सेवा का विरासत से मिला है। अपने पिता बलविंदर सिंह को दिन रात याद करता हूं। आज लोग मुझे कारगिल शहीद का बेटा होने के नाते सम्मान देते हैंं।

बलजीत कौर ने अपने पति के अंतिम संस्कार मौके यह ठान ली कि सिमरजीत सिंह के माथे पर तभी शादी का सेहरा सजेगा जब वह फौजी बनेगा। अक्टूबर 2016 में कोमल कौर के साथ विवाहुता बंधन में बंध चुके सिमरजीत सिंह ने बताया कि युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह देश को समर्पित होकर फौज में अपनी सेवाएं दे। देश की सबसे बड़ी सेवा सीमा पर तैनात होकर की जा सकती है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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