जागरण संवाददाता, संगरूर

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां द्वारा किसानी मांगों की पूर्ति के लिए पंजाब सरकार के खिलाफ जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स के समक्ष लगाए पक्के मोर्चे रविवार को भी जारी रहे। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की तरफ से तीन जनवरी को रखी गई बैठक सात जनवरी तक स्थगित किए जाने की किसान संगठनों ने कड़ी निदा की। किसानों ने सरकार के इस रवैये के खिलाफ अपने धरनों को अनिश्चितकालीन समय के लिए बड़ा दिया है। साथ ही एलान किया है कि सोमवार को किसान कड़ा रुख अपनाएंगे। रविवार को भाकियू उगराहां की ईकाईयों में हर ब्लाक व गांव में केंद्र सरकार का पुतला फूंका।

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिलाध्यक्ष अमरीक सिंह गंढूआं व जिले के महासचिव दरबारा सिंह छाजला के नेतृत्व अधीन 14वें दिन भी धरना जारी रहा। धरने के दौरान प्रांतीय प्रचार सचिव जगतार सिंह कालाझाड़ ने बताया कि चन्नी सरकार ने पांच मागें मानी थीं, लेकिन अभी तक लागू नहीं की गई। उन्होंने प्रमुख मांगों का जिक्र करते हुए बताया कि गुलाबी सुंडी से तबाह हुई नरमे की फसल के लिए 17 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने, मुआवजे का 10 फीसद मजदूरों को देने, गन्ने का भाव 360 रुपये प्रति क्विटल देने, खुदकुशी कर चुके किसानों के परिवारों को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने व सारा कर्ज माफ करने, ढाई एकड़ वाले किसानों को खेती कनेक्शन तुरंत देने, पांच एकड़ तक दो लाख कर्जे की माफी देने, आंदोलनकारी किसानों पर डाले झूठे पर्चे रद करने, टोल प्लाजा के बढ़े हुए रेट वापस लेने व उनके मुलाजिमों को बनता बकाया देने व बहाल करने, घर-घर रोजगार देने, नशा माफिया समेत हर तरह के माफिया को खत्म करने, सार्वजनिक अदारे बेचने बंद करने आदि मांगों के हल संबंधी अभी तक सरकार ने कोई पहल कदमी नहीं की है। उन्होंने कहा कि चुनाव समय नजदीक आता देख सियासी पार्टियां व उनके लीडर आम लोगों को वोट हासिल करने के लिए भरमा रहे हैं। जो फसल ओलावृष्टि व बारिश के कारण तबाह हो गई है, उस संबंधी पूरी रिपोर्ट अभी तक डीसी कार्यालयों में अभी तक नहीं पहुंचाई गई। किसान नेताओं ने बताया कि पांच जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब पहुंच रहे हैं, जिसके विरोध में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। तीन व चार जनवरी को पंजाब के गांवों में रोष प्रदर्शन करके केंद्र सरकार के पुतले दहन किए जाएंगे।

धरने में किसान नेता कृपाल सिंह धूरी, अजैब सिंह जखेपल, बलवीर सिंह कौहरियां, बंटी ढींडसा, जसवीर कौर लहिल कलां, बलजीत कौर खड़ियाल, दर्शन सिंह, चरनजीत सिंह, दर्शन सिंह हथोआ, जोगिदर सिंह खेड़ी नागा, रणजीत सिंह लौंगोवाल, अजैब सिंह लौंगोवाल, महिदर सिंह नमोल, शेर सिंह महोली, निर्मल सिंह, बहादर सिंह भुटाल खुर्द, सुखपाल माणक कणकवाल आदि उपस्थित थे।

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