मनदीप कुमार, संगरूर

शहर को सौ फीसद सीवरेज व पेयजल की सुविधा सहित गली-मोहल्लों को रोशन करने के लिए लगाए जाने वाले एक हजार लाइटों के पोल आज भी शोपीस बने हुए हैं। अधिकतर मोहल्लों में जहां लाइटों के पोल नहीं लगे हैं, वहीं जहां पर पोल लगाए गए हैं, वहां पोल लाइट को तरस रहे हैं। अडरग्राउंड तारें डाली जा चुकी हैं, लेकिन इनके कनेक्शन न होने के कारण यह पोल केवल सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि डेढ़ वर्ष के भीतर इस प्रोजेक्ट को संपन्न करके शहर को रोशन किया जाना था, लेकिन पांच वर्ष बाद भी एक हजार लाइटें नहीं लग पाई हैं।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2016 के दौरान संगरूर में 110 करोड़ रुपये की लागत का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट आरंभ किया गया था। इस प्रोजेक्ट के अधीन शहर की जिन बस्तियों व सीवरेज की लाइन डाली जानी थी, वहीं पर गली-मोहल्लों को रोशन करने के लिए एक हजार एलईडी स्ट्रीट लाइटों के पोल लगाए जाने थे। इस प्रोजेक्ट को डेढ़ वर्ष के भीतर संपन्न किया जाना था कितु साढ़े चार वर्ष का समय गुजर जाने के बाद भी न तो उक्त प्रोजेक्ट संपन्न हो पाया है व न ही एक हजार लाइटें लग पाई हैं। --------------------- 27 हजार रुपये का है एक पोल, हड़प कर लिए सैकड़ों पोल

गौर हो कि उक्त एलईडी लाइट के पोल की प्रोजेक्ट के अनुसार तत्कालीन समय में कीमत 27 हजार दो सौ रुपये थी। अनुमान के मुताबिक दो करोड़ 72 लाख रुपये की राशि शहर की बस्तियों को रोशन करने पर खर्च होनी थीे, लेकिन साढ़े चार वर्ष के दौरान एक हजार में से सात सौ के करीब ही पोल लग पाए हैं। बाकी करीब चार सौ पोल का कोई अतापता नहीं है। सीवरेज बोर्ड के अधीन इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदार मुम्बई की शाहपुरजी प्लोंजी कंपनी को सौंपी गई है, लेकिन कंपनी अभी तक शहर में एक हजार स्ट्रीट लाइट के पोल नहीं लग पाई।

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- जहां लगे पोल, वहां नहीं हुए कनेक्शन

प्रोजेक्ट अधीन संत अतर सिंह नगर, अजीत नगर, उपली रोड, उभावाल रोड सहित अन्य इलाकों में जहां पर एलईडी लाइटों के पोल लगाए गए हैं, वहां लाइटों के कनेक्शन न होने के कारण पोल केवल सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। अंडरग्राउंड तारें डाल गई है और पोल भी स्थापित हो चुके हैं। कनेक्शन न किए जाने के कारण लाइटें जल ही नहीं रही हैं। मोहल्ला निवासी अजीत सिंह, मेजर सिंह, शमशेर सिंह, प्रीतपाल सिंह, जसविदर सिंह, जोगिदर सिंह, नाहर सिंह ने कहा कि पिछले छह माह से इन लाइटों के कनेक्शन नहीं किए गए। शाम के समय मोहल्ले अंधेरे के आगोश में समा जाते हैं। --------------------------- पहले भी हुई जांच, प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाला मसला

उक्त प्रोजेक्ट की ढीली रफ्तार, सीवरेज व जल सप्लाई की लाइनें न डालने, स्ट्रीट लाइटें न लगाए जाने बाबत शहर निवासी व सीनियर भाजपा नेता जतिदर कालड़ा ने पंजाब सरकार व जिला प्रशासन को इस बाबत शिकायत भी की थी। करीब चार माह तक चली जांच-पड़ताल के बाद प्रोजेक्ट कंपनी व सीवरेज बोर्ड की लापरवाही खुलकर सामने आई थी। प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई करने व प्रोजेक्ट को सही ढंग से पूरा करवाने की बजाए, मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लिहाजा आज भी प्रोजेक्ट अधीन होने वाले कार्य अधूरे हैं। प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाली 110 करोड़ से अधिक की राशि संपन्न होने के बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा है। ----------------------

सीवरेज बोर्ड को लिखा, एक वर्ष से कनेक्शन का इंतजार

प्रोजेक्ट इंचार्ज भरत कुमार भाटी ने कहा कि सात सौ के करीब पोल लग चुके हैं। लाइटें चालू करने के लिए बिजली कनेक्शन की जरूरत है। उनकी तरफ से सीवरेज बोर्ड को करीब एक वर्ष पहले कनेक्शन नगर कौंसिल के जरिये जलाने को लिखा गया था, लेकिन अभी तक कनेक्शन नहीं मिला है। बिजली कनेक्शन मिलने के बाद लाइटों को चालू किया जा सकता है।

Edited By: Jagran