पंजाब के संगरूर में बड़ा हादसा, सुरक्षा नियमों की अनदेखी से गई 8 मजदूरों की जान; लोगों में रोष
संगरूर में लहरागागा-जाखल रोड पर मनरेगा मजदूरों के साथ हुए सड़क हादसे ने सुरक्षा में भारी लापरवाही उजागर की है। इस घटना में कई मजदूरों की मौत हुई।
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हादसे दौरान मजदूरों पर निगरानी के नहीं था कोई, नियमों की उड़ी धज्जियां।
HighLights
मनरेगा मजदूरों के साथ लहरागागा-जाखल रोड पर हादसा।
सुरक्षा उपायों और विभागीय निगरानी की भारी कमी।
लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ितों को मुआवजा मांग।
जागरण संवाददाता, संगरूर। लहरागागा-जाखल रोड पर रविवार दोपहर बाद वीबी जीरामजी (मनरेगा) मजदूरों के साथ हुए भयानक सड़क हादसे ने विभागों की कुंभकरणी नींद व लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है, वहीं सितंबर 2024 को सुनाम-पटियाला रोड पर गांव बिशनपुरा समीप हुए हादसे की याद ताजा कर दी, जब एक बेकाबू ट्रक ने सड़क किनारे काम करते 4-5 मनरेगा मजदूरों को रौंद दिया था।
आज के हादसे ने एक बार फिर वीबी जीरामजी (मनरेगा) मजदूरों से मेन रोड पर काम करवाने दौरान निगरानी व सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए। सुरक्षा के लिए सड़क किनारे कोई बैरिकेटिंग नहीं की, न ही मौके पर कोई विभागीय अधिकारी निगरानी पर तैनात रहा।
हादसे दौरान मजदूरों पर निगरानी के नहीं था कोई कर्मचारी
मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण, रिफ्लेक्टर जैकेट तक नहीं पहनाई गई और न ही कोई रिफ्लेक्टर या काम चलने संबंधी कोई सूचना बोर्ड लगाया गया। हादसे के बाद मजदूरों संगठनों ने जाखल रोड पर हादसे स्थल समीप धरना लगाकर सरकार, जिला प्रशासन व संबंधित विभाग का लापरवाही के खिलाफ रोष जाहिर किया।

जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के प्रतिनिधि बिक्कर सिंह हथोआ, मजदूर मुक्ति मोर्चा के नेता गोबिंद सिंह छाजली सहित गांव अलीशेर के भारी गिनती में ग्रामीण, पंचायत ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि इस हादसे में कार ड्राइवर सहित अधिकारियों की भी बराबर की जिम्मेदारी है, क्योंकि हादसे के दौरान मजदूरों की सुरक्षा में पूरी तरह से लापरवाही बरती गई है।

हादसे के दौरान लेबर विभाग, पंचायत विभाग या सिविल प्रशासन का कोई अधिकरी या कर्मचारी जीरामजी मजदूरों की निगरानी में तैनात नहीं था। इसके मद्देनजर उनकी मांग है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बनती सख्त कार्रवाई की जाए, क्योंकि ऐसा हादसे पहले भी हो चुका है, लेकिन सरकार या प्रशासन ने इससे कोई सबक नहीं लिया है। जिसकी वजह से अब दोबारा से हादसे में कई परिवार बिखर चुके हैं।
एंबुलेंस में देरी पर ग्रामीणों में रोष
प्रत्यक्षदर्शी फैक्ट्री मुलाजिम हरविंदर सिंह उर्फ लवी ने कहा कि हादसे की आवाज सुनते ही वह सबसे पहले मौके पर पहुंचा था। इस दौरान कई महिलाएं कार की चपेट में आने से सिसक रही थी व सड़क पर घायल मजदूर ईधर-उधर पड़े थे। इस दौरान महिला मजदूरों के साथ कोई अन्य व्यक्ति या अधिकारी मौजूद नही था।

इतने में धीरे-धीरे राहगीर भी मौके पर रुके व ग्रामीण भी पहुंचे, सभी ने एंबुलेंस व पुलिस को मदद के लिए फोन किए, लेकिन करीब 1 घंटे बाद एंबुलेंस आई। मजदूरों को कुचलने वाला गाड़ी ड्राइवर 15 मिनट तक रुका रहा। जब पुलिस आई तो वह भाग गया।
नहीं मिली समय पर मदद

गांव अलीशेर के पंच अमृतपाल सिंह, हरप्रीत सिंह अलीशेर ने कहा कि हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस व चोटियां चौंकी पुलिस को सूचना दी, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी कोई एंबुलेंस मदद के लिए घटनास्थल पर नहीं पहुंची। इसके चलते घायलों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हुई। इसी कारण कई मजदूरों की मौत हो गई। अगर समय पर मदद मिल जाती तो कई मजदूरों की जिंदगी बच सकती थी।
आरोपितों को सजा व पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

सिविल अस्पताल लहरागागा में मौके पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के पुत्र राहुल इंद्र सिद्धू ने जहां घायलों व मृतकों के परिजनों का हालचाल जाना, वहीं हादसे के जिम्मेदार कार चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी सरकार द्वारा प्रदान की जानी चाहिए। यह हादसे सरकार की लापरवाही का नतीजा है, जहां जीरामजी (मनरेगा) मजदूरों की सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं किया गया।
लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई
डीसी पूनमदीप कौर ने कहा कि वीबी जीरामजी (मनरेगा) के तहत काम करवाने वाले संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। इस कार्य दौरान निगरानी व सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
