संवाद सहयोगी, आनंदपुर साहिब

अपने आपको धर्म के रक्षक तथा सियासत से कोसों दूर बताने वाले कुछ लोगों द्वारा बेअदबी के मुद्दे पर पंथक असेंबली बुलाने की बात कहना बहुत ही हास्यास्पद लग रहा है। क्योंकि जहां वह सभी अपनी गुम हो चुकी साख को बचाने के लिए छटपटा रहे हैं, वहीं उनके द्वारा बुलाई जाने वाली असेंबली की बुनियाद ही राजनीतिक है। ये शब्द शिरोमणि कमेटी के प्रधान भाई गो¨बद ¨सह लोंगोवाल ने कहे। उन्होंने कहा कि वह लोग अपने 100 साल पूरे करने जा रही पंथक जत्थेबंदी शिरोमणि अकाली दल में कई कई साल विभिन्न ओहदों पर रह चुके हैं, वह आज अपन निजी स्वार्थ तथा सियासी तौर पर हाशिये पर चले जाने के कारण बेअदबी को आधार बनाकर आए दिन सुर्खियों में रहने की कोशिश कर रहे हैं। यदि उनके द्वारा विधानसभा हलकों की तरज पर 117 सदस्यों की पंथक असेंबली की जगह पर शिरोमणि कमेटी की तरह 177 सदस्यों वाली असेंबली का आह्वान किया होता तो हम मान भी सकते थे कि उनका प्रयास धार्मिक है। लेकिन अब तो ये स्पष्ट हो गया है कि वह एक विशेष सियासी जमानत के इशारे पर ही पंथक असेंबली करवाकर शिरोमणि कमेटी पर कब्जा करने के प्रयास कर रहे हैं। मनमर्जियां फिल्म की बात करते हुए लोंगोवाल ने कहा कि हम बार बार फिल्म बनाने वालों को ये अपील कर चुके हैं कि सिख किरदारों को गलत ढंग से ना फिल्माया जाए। यदि फिर भी वह बाज नहीं आएंगे तो शिरोमणि कमेटी उनको अदालतों में घसीटेगी। मनमर्जियां फिल्म के बारे में कानूनी माहिरों की राय ली जा रही है।

Posted By: Jagran

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