अरूण कुमार पुरी, रूपनगर : शहरों व गांवों को साफ-सुथरा तथा लोगों को स्वस्थ बनाने का सपना लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने जो स्वच्छ एवं स्वस्थ भारत अभियान पूरे उत्साह के साथ पूरे देशभर में शुरू करवाया था वह अब ज्यादातर शहरों व गांवों में दम तोड़ चुका है। हालांकि हर साल दो अक्टूबर को संकल्प लेकर सफाई अभियान शुरू किया जाता है। लेकिन हर बार सफाई अभियान फोटो सेशन तक सीमित होकर रह जाता है। अब मात्र 20 दिनों के बाद दो अक्टूबर का दिन फिर से आने वाला है जिसको लेकर शहर में अभी से गणमान्यों के फोटो सेशन की चर्चाएं शुरू हो गई हैं जबकि शहर में जगह-जगह फैली गंदगी स्वच्छ एवं स्वस्थ भारत अभियान की हवा निकाल रही है।

फोटो सेशन में सिमटा सफाई अभियान

दो अक्टूबर 2014 से लेकर आज तक अगर हर किसी ने इमानदारी से सफाई अभियान को अंजाम देने की कोशिश की होती तो शायद देश का कोना-कोना चमक रहा होता। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका क्योंकि हर बार सफाई अभियान मात्र फोटो सेशन तक ही सीमित होकर सिमट कर रह गया। किसी शहर में दस दिन तो किसी में 15 दिन चले सफाई अभियान में झाड़ू आदि बेचने वालों की तो चांदी रही। लेकिन गंदगी पर झाडू नहीं फिरा क्योंकि वीआईपी लोगों के लिए खरीदे झाड़ू उद्घाटन के बाद चले ही नहीं। अकसर यह भी देखा गया है कि आम जनता को सफाई के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से क्षेत्र के जिन गणमान्यों के हाथों में नए-नए झाड़ू थमाते हुए सफाई का आगाज करवाया जाता है उनसे सफाई उन स्थलों की करवाई जाती है जहां पहले से ही जगह पूरी तरह साफ होती है। अब अगर अभियान का ऐसा आगाज होगा तो उसका अंजाम कैसा होगा। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

डस्टबिन बावजूद भी कूड़ा खुले में फैला

रूपनगर में लगभग हर वार्ड व मोहल्ले में कहीं न कहीं गंदगी का ढेर देखा जा सकता है। यही नहीं शहर के उन क्षेत्रों में भी गंदगी के ढेर लगे हैं जिनके आसपास बड़े-बड़े अधिकारियों के बसेरे हैं। बात कर रहे हैं ज्ञानी जैल ¨सह नगर के साथ वाल्मीकि गेट, बेला चौक, गोशाला रोड, रेलवे स्टेशन के पास, बस स्टेंड व उसके आस-पास वाले क्षेत्रों की जहां नगर कौंसिल द्वारा बाकायदा डस्टबिन तो उपलब्ध करवाए हैं। लेकिन उनमें गंदगी कम जबकि उनके आस-पास खुले में अधिक फैली हुई है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

कौंसिल अध्यक्ष सहित पार्षदों की जवाबदेही तय हो

शहर में सफाई सुनिश्चित बनाने का दायित्व नगर कौंसिल के सत्ताधारी पक्ष का बनता है जिसके लिए कौंसिल अध्यक्ष सहित पार्षदों की जवाबदेही तय होनी चाहिए अथवा ऐसे लापरवाह लोगों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।

(सेवानिवृत अफसर प्रेम कुमार शर्मा)

गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई करने की मांग

सफाई का मुद्दा हो या शहर के हित में बनाए नियमों को लागू करने की बात। इसमें किसी भी स्तर पर वोट की राजनीति नहीं होनी चाहिए। अगर कोई गंदगी को फैलाने का कारण बनता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

(सीनियर सिटीजन सुखदेव ¨सह)

जुर्माने का अधिकार बावजूद भी गंदगी

नगर कौंसिल के पास गंदगी फैलाने वालों को जुर्माना करने का अधिकार होने के बावजूद अगर इसका प्रयोग नहीं किया जाता है तो गंभीर ¨चता का विषय है। शहर के हित में गंदगी फैलाने वालों पर मोटा जुर्माना होना चाहिए।

(समाजसेवी अवतार सिंह लौंगिया)

शहर को साफ रखने में जनसहयोग जरूरी

नगर कौंसिल के अध्यक्ष परमजीत ¨सह माक्कड़ ने कहा कि शहर की सफाई को लेकर कौंसिल पूरी तरह से गंभीर रही है जबकि कौंसिल के सफाई सेवक भी हर दिन पूरी लग्न से सफाई को अंजाम देते हैं। लेकिन ज्यादातर शहर वासी सफाई को बनाए रखने में सहयोग नहीं देते। कौंसिल द्वारा जगह-जगह डस्टबिन उपलब्ध करवाने के बावजूद लोग घरों व दुकानों की गंदगी सड़कों के किनारे लगा जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई गंदगी डस्टबिन से बाहर गिराते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran