संवाद सूत्र, मोरिडा: केंद्र सरकार की गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई आटा- दाल स्कीम के तहत नीले कार्ड धारकों को दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से गेहूं मुहैया की जाती है। इसी कड़ी में प्रदेश के हर डिपो में जहां लोगों को गेहूं बाटी जाती है, पर यह गेहूं कितने साफ है, इसकी कोई जांच नहीं की जा रही है ऐसा ही एक मामला यहां के एक डिपो में सामने आया है, जहां डिपो होल्डर ने बिना किसी जांच के गरीब परिवारों को जो गेहूं बांटा दी, जिसमें मरे हुए चूहे और सड़ा हुआ पुराना गेहूं निकला। इससे इलाके के नीले कार्डधारकों में सरकार के खिलाफ रोष है। लाभार्थी गुरदीप सिंह वासी वार्ड नंबर नौ मोहल्ला कुचीगर ऊंची घाटी ने बताया कि उसने मंगलवार को शैली वर्मा डिपो होल्डर मोरिडा से अपने परिवार के छह सदस्यों के लिए 180 किलो गेहूं खरीदी। जब उसने अपने पारिवारिक मेंबर के सामने गेहूं की बोरियां खोली, तो उनमें सड़ा हुआ गेहूं और मरे हुए चूहे निकले। इसकी उन्होंने तुरंत सूचना डिपो होल्डर को दी, लेकिन डिपो होल्डर ने गेहूं को वापस लेने मना कर दिया। वहीं गुरमेल सिंह, शेर सिंह पम्मा, सुरिदर सिंह ने बताया कि उन्हें भी नौ माह बाद गेहूं दी गई। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि इस मामले की जांच की जाए। दूसरी तरफ, डिपो होल्डर शैली वर्मा ने कहा कि लाभार्थियों के उन पर लगाए आरोप बेबुनियाद हैं। गुरदीप सिंह के पारिवारिक सदस्य गेहूं वापस करने के लिए नहीं आए। अगर कोई आता तो गेहूं बदलकर दी जाती। उधर गोदाम इंचार्ज सतविदर सिंह और चमन लाल ने बताया कि वह खुद हैरान हैं कि उनके गोदाम में गला सड़ा और मरे हुए चूहे वाली गेहूं की बोरियां कैसे आ गईं। वह कुछ दिनों में 3500 से अधिक बोरी गेहूं की बांट चुके हैं। पहले ऐसी कोई शिकायत नहीं आई।

Posted By: Jagran

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