पंजाब में एक दिन में 584 जगह जली पराली, खन्ना की हवा सबसे खराब
पंजाब में धान की कटाई के साथ पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, एक दिन में 584 जगह ...और पढ़ें

पंजाब में पराली जलाने का सिलसिला तेज।
HighLights
एक दिन में 584 जगह पराली जलाने की घटनाएं।
खन्ना में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंची।
तरनतारन में सर्वाधिक 545 पराली जलाने के मामले।
जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब में धान की कटाई के साथ पराली जलाने की घटनाओं का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। राज्य में कल तीन नवंबर को एक दिन में ही 584 जगह पराली जला दी गई। ऐसे में राज्य के विभिन्न शहरों की हवा की गुणवत्ता भी बिगड़ गई है। खन्ना में जहां 401 एक्य्आइ के साथ हवा की गुणवत्ता खतरनाक कैटेगरी में पहुंच गई वहीं पटियाला और जालंधर में इसे खराब कैटेगरी में पाया गया है।
जालंधर में बुधवार को अधिकतम एक्यूआई जहां 278 दर्ज किया गया वहीं पटियाला में यह अधिकतम 262 पाया गया। दूसरी ओर लुधियाना, अमृतसर और मंडी गोबिंदगढ़ में एक्यूआई माडरेट कैटेगरी में यानि 101 से 200 के दरम्यान रहा। अब तक पराली जलाने के कुल 2196 मामले सामने आ चुके हैं।
इनमें चाहे सबसे ज्यादा 545 मामले तरनतारन जिला से हैं, वहीं अब अन्य जिलों जैसे फिरोजपुर, बठिंडा और संगरूर में मामले लगातार बढ़ने लगे हैं। फिरोजपुर 305 मामलों के साथ दूसरे और अमृतसर 198 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है। राज्य में इस बार कुल 32.87 लाख हेक्टेयर धान क्षेत्र में से 80.90 प्रतिशत की कटाई पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद खेतों में आग लगाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो तरनतारन में पराली जलाने के 545 मामले सामने आए हैं। जिले में 267 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जिसकी कुल राशि 13.60 लाख रुपये है। इसमें से 13.30 लाख रुपये की वसूली भी की जा चुकी है। इसके अलावा जिले में पराली जलाने के मामलों में 265 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
यह राज्य के कुल 494 एफआईआर मामलों में आधे से ज्यादा हैं। फिरोजपुर में 305 मामले दर्ज हुए हैं। यहां 2.45 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जबकि 45 हजार रुपये की वसूली हुई है। अमृतसर में 198 मामलों के मुकाबले 111 स्थानों पर आग की पुष्टि हुई। यहां पांच लाख रुपये का मुआवजा लगाया गया और 4.45 लाख रुपये वसूल किए गए।
एक अहम पहलू यह भी है कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है। राज्य में कुल 16 नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों के खिलाफ सीएक्यूएम एक्ट की धारा 14 के तहत अभियोजन की कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें 13 अधिकारी तरनतारन और तीन अधिकारी फरीदकोट जिले से संबंधित हैं। हालांकि, रिपोर्ट में किसी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट जारी करने या निलंबन आदेश दिए जाने का आंकड़ा शून्य है।
राज्यभर में पराली जलाने के मामलों में 3.20 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है, जिसमें से 2.06 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। इसके अलावा 527 खेतों के राजस्व रिकार्ड में रेड एंट्री की गई हैं। वहीं, नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों को कुल 609 चेतावनी नोटिस या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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