पंजाब में पराली बनेगी उद्योगों का ईंधन, 73 इकाइयों में 40 लाख टन होगी खपत; CBG-बायोगैस प्लांट भी करेंगे उपयोग
पंजाब में धान की पराली अब अभिशाप के बजाय उद्योगों के लिए ईंधन की ताकत बनेगी। राज्य की 73 औद्योगिक इकाइयां 40.87 लाख टन फसल अवशेष का व्यावसायिक उपयोग करेंगी।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
73 औद्योगिक इकाइयां 40 लाख टन पराली का करेंगी उपयोग।
CBG, बायोगैस और थर्मल प्लांट भी पराली को बनाएंगे ईंधन।
पराली प्रबंधन से प्रदूषण घटेगा, किसानों की आय बढ़ेगी।
गौरव सूद, पटियाला। पंजाब के खेतों में हर साल धुआं बनकर हवा में घुलने वाली पराली अब राज्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षेत्र के लिए ऊर्जा का नया विकल्प बनने जा रही है। धान के सीजन में फसल अवशेष जलाने से पैदा होने वाली पर्यावरण की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए इस बार नीति में बड़ा बदलाव किया गया है।
सरकार ने केवल किसानों पर दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय इसके वैज्ञानिक, औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया है। इस नई रणनीति के तहत राज्य की 73 बड़ी औद्योगिक इकाइयों ने पराली को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इन इकाइयों में करीब 40.87 लाख टन (4.087 मिलियन टन) पराली को ईंधन के तौर पर खपाया जाएगा।
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188 लाख टन पराली पैदा होने का अनुमान
अनुमान के मुताबिक, इस धान सीजन के दौरान राज्य में लगभग 188 लाख टन पराली पैदा होने की संभावना है। इतने बड़े पैमाने पर फसल अवशेष का प्रबंधन करने के लिए इन-सीटू (खेत के अंदर) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) दोनों तरीकों को समान रूप से लागू किया जा रहा है।
योजना के अनुसार 101.5 लाख टन पराली का खेत में ही निपटारा किया जाएगा, जबकि 78 लाख टन पराली को खेतों से बाहर निकालकर फैक्ट्रियों, ईंट-भट्ठों, बायोगैस प्लांटों और थर्मल पावर प्लांटों में कच्चे माल के रूप में भेजा जाएगा।
लुधियाना में होगी सबसे अधिक खपत
औद्योगिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पराली आधारित ईंधन के उपयोग में सबसे आगे औद्योगिक शहर लुधियाना है, जहां की 14 फैक्ट्रियों में पराली का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा फतेहगढ़ साहिब की 11, मोहाली की सात और संगरूर की छह औद्योगिक इकाइयों में भी पराली से ऊर्जा बनाई जा रही है।
इतना ही नहीं, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और पारंपरिक बायोगैस प्लांटों में भी लाखों टन पराली की खपत शुरू की गई है। इस दूरदर्शी कदम से न केवल प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगेगा, बल्कि किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए अतिरिक्त आय के नए रास्ते भी खुलेंगे।
CBG और बायोगैस प्लांट भी करेंगे पराली का इस्तेमाल
पराली प्रबंधन को उद्योगों तक सीमित नहीं रखा गया है। राज्य में स्थापित छह कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट करीब 0.3032 मिलियन टन पराली को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल शुरू किया गया है। वहीं 11 बायोगैस प्लांटों में करीब 1.17 मिलियन टन पराली के उपयोग हो रहा है। इससे फसल अवशेष को ऊर्जा में बदलने के साथ-साथ वैकल्पिक ईंधन और बायोएनर्जी के क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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ईंट-भट्ठों से थर्मल प्लांट तक पहुंचेगी पराली
पराली के व्यावसायिक इस्तेमाल का दायरा अब ईंट-भट्ठों और बिजली उत्पादन तक भी पहुंचाया जा रहा है। राज्य के 2,245 ईंट-भट्ठों में करीब 0.48915 मिलियन टन पराली के इस्तेमाल शुरू हो चुका है। इसके अलावा राज्य के पांच थर्मल प्लांट करीब 1.183 मिलियन टन पराली का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी खेत में बेकार समझी जाने वाली पराली अब ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक ईंधन और बायोएनर्जी की श्रृंखला का हिस्सा बनने जा रही है।
| क्र.सं. | जिला | औद्योगिक इकाइयां | पराली का प्रस्तावित उपयोग (मिलियन टन में) |
| 1 | अमृतसर | 2 | 0.0845 |
| 2 | बरनाला | 2 | 0.0130 |
| 3 | बठिंडा | 2 | 0.4000 |
| 4 | फतेहगढ़ साहिब | 11 | 0.3845 |
| 5 | फिरोजपुर | 3 | 0.0400 |
| 6 | गुरदासपुर | 2 | 0.0500 |
| 7 | होशियारपुर | 4 | 0.0235 |
| 8 | जालंधर | 2 | 0.0890 |
| 9 | कपूरथला | 1 | 0.6500 |
| 10 | लुधियाना | 14 | 0.6855 |
| 11 | मलेरकोटला | 4 | 0.0350 |
| 12 | मोगा | 3 | 0.0950 |
| 13 | मुक्तसर | 3 | 0.5380 |
| 14 | पठानकोट | 2 | 0.0450 |
| 15 | पटियाला | 3 | 0.0140 |
| 16 | मोहाली | 7 | 0.3780 |
| 17 | संगरूर | 6 | 0.3900 |
| 18 | तरनतारन | 2 | 0.1720 |
| कुल | 18 जिले | 73 | 4.0870 |
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